मधेपुरा- सहरसा-सुपौल रोड नंबर 18 वेंटिलेटर पर

उदासीनता. िवभागीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे ध्यान सिंहेश्वर : गौरीपुर पंचायत सिंहेश्वर प्रखंड मुख्यालय की हृदय स्थली कहलाती है, लेकिन इस हृदय स्थली की सांस अब रुकने लगी है. पंचायत की लाइफ लाइन 18 नंबर सड़क वेंटिलेटर पर है. यह सड़क गत कई वर्षों से राजनीति व प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बन कर […]

उदासीनता. िवभागीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे ध्यान

सिंहेश्वर : गौरीपुर पंचायत सिंहेश्वर प्रखंड मुख्यालय की हृदय स्थली कहलाती है, लेकिन इस हृदय स्थली की सांस अब रुकने लगी है. पंचायत की लाइफ लाइन 18 नंबर सड़क वेंटिलेटर पर है. यह सड़क गत कई वर्षों से राजनीति व प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बन कर रह गया है. हल्की सी बरसात हुई नहीं कि सड़क पर बने गड्ढे में पानी भर जाता है. गौरीपुर की बड़ी आबादी के आवागमन का एक मात्र साधन रोड नंबर 18 की दुर्दशा पर लोग केवल सरकार को कोस कर रह जाते हैं.
क्यों लाइफ लाइन है यह सड़क. एनएच 106 से पूर्व दिशा की ओर करीब तीन किलोमीटर तक इस सड़क के दोनों ओर गौरीपुर के लोग रहते है. इसी सड़क में सिंहेश्वर आदर्श थाना, प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय व अस्पताल भी है. केवल गौरीपुर ही नहीं पूरे प्रखंड के लोगों को यहां आने के लिए इसी सड़क का सहारा लेना पड़ता है. प्रखंड की एक बड़ी आबादी को इसी सड़क होकर बाजार आना पड़ता है, पशु हाट आना परता है. सबसे बड़ी बात उत्तर बिहार के सुप्रसिद्ध मंदिर तक भी इसी सड़क के सहारे पहुंचती है. इसलिए इस सड़क को गौरीपुर ही नहीं अन्य पंचायतों की भी लाइफ लाइन कही जाये, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.
निर्माण एजेंसी ने मरम्मत से मुंह मोड़ा . वर्ष 2013 में स्थानीय विधायक ने इस सड़क का शिलान्यास किया था. निर्माण एजेंसी ने लेटलतीफी से काम शुरू किया. जैसे तैसे वर्ष 2015 के अंत तक सड़क बनायी तो गयी, लेकिन एक किमी की दूरी सिंहेश्वर थाना से सिंहेश्वर बाजार स्थित एनएच 106 तक अधूरी रही. इस समस्या को प्रभात खबर ने बार-बार प्रकाशित किया, तो डीएम मो सोहैल ने इस पर संज्ञान लेते हुए किसी तरह इस एक किमी सड़क का निर्माण कराया. बाद में डीएम के कोशिश से इस एक किमी का निर्माण किसी तरह कराया गया, लेकिन इस एक किमी के निर्माण की गुणवत्ता खराब थी. पहली बारिश में ही सड़क टूट गयी.
हालांकि नियमानुसार इस सड़क मरम्मत निर्माण एजेंसी को पांच वर्ष तक करना है. इसके बावजूद निर्माण एजेंसी ने इस ओर ध्यान तक नहीं दिया.
क्या हैं हालात. इस सड़क की हालत खस्ता है. सिंहश्वर बाजार से लेकर सिंहेश्वर थाना तक सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं है. वहीं पूर्व दिशा में पटोरी, चौसार, बिरैली, बेलारी बाजार व इससे आगे रोड नंबर 18 जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है. सिंहेश्वर बाजार में इस रोड से होकर चलने वाले लोग इसकी तुलना नरक से करते हैं. जगह- जगह गड्ढों में पानी जमा है. कीचड़ देख कर अगर जरूरी काम न हो तो लोग कई दिनों घर से बाहर नहीं निकलते.
डीएम ने इस सड़क को सिंहेश्वर थाना तक ढलाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्माण के पांच वर्ष तक सड़क का मरम्मत निर्माण एजेंसी को करना है. निर्माण एजेंसी आइपीसीएल को बार-बार हिदायत दी जा रही है. संवेदक द्वारा एक महीने में कार्य को पूरा करने की बात कही गयी है. इसके बावजूद काम नहीं हुआ, तो नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.
शैलेंद्र कुमार , कार्यपालक अभियंता, आरडब्लूडी

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