खबरी बन अपराध का चला रहा रैकेट

मुंगेर : अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस कभी-कभी छोटे-छोटे अपराधियों का सहयोग लेती है. इन्हीं अपराधियों में कुछ शातिर रहता है जो पुलिस का मुखबिर व खबरी बन कर बड़े अपराध को अंजाम देता है. क्योंकि उसे पुलिस का डर नहीं रहता और पुलिस का हर दांव उसे पता रहता है. […]

मुंगेर : अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस कभी-कभी छोटे-छोटे अपराधियों का सहयोग लेती है. इन्हीं अपराधियों में कुछ शातिर रहता है जो पुलिस का मुखबिर व खबरी बन कर बड़े अपराध को अंजाम देता है. क्योंकि उसे पुलिस का डर नहीं रहता और पुलिस का हर दांव उसे पता रहता है. मुंगेर में पुलिस का मुखबिर बन कर कई ऐसे अपराधी है

जो अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया. जबकि पुलिस-थानों की दलाली कर अधिकांश खबरी लाखों की संपत्ति अर्जित कर ली. पुलिस ने सब्जी व्यवसायी से रंगदारी मामले में जब गुलजार पोखर के मो. इम्तियाज उर्फ गुड्डू गिरफ्तार किया तो एक बार फिर यह बात चर्चा में आ गया कि किस प्रकार पुलिस की मुखबिरी कर खबरी अपराधिक घटना को अंजाम दे रहा है.

मुखबिर बन कर दे रहा घटना को अंजाम : मो इम्तियाज उर्फ गुड्डू का पूराना इतिहास दागदार रहा है. हत्या के मामले में वह पूर्व में भी जेल जा चुका है. जेल से निकलने के बाद वह कुछ दिनों के लिए अंडर ग्राउंड हो गया. पिछले दो वर्ष से वह कोतवाली थाना का मुखबिर बन गया. जिसके कारण थाना में उसका आना-जाना प्रारंभ हो गया.
कहा जा रहा है कि गुड्डू मुखबिरी के नाम पर थाने में दलाली का काम प्रारंभ कर दिया. जिससे उसने काफी कमाई की. वह जहां लग्जरी वाहन खरीद लिया. वहीं रहन-सहन भी उसका बदल गया. उसकी थाने में काफी पूछ होने लगी. वह थाने में रहकर अापराधिक गतिविधियों को भी संचालित करने लगा. मुंगेर के सब्जी के थोक विक्रेता सकलदेव महतो से तीन लाख रुपये की रंगदारी अपराधियों ने मांगी. पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी प्रारंभ किया.
इधर अपराधी सब्जी विक्रेता को धमकी देते रहा. अपराधी यहां तक कह रहा था कि तुम फलां दिन पुलिस में शिकायत किया. थाने जाकर तुम फोन की जानकारी दे रहे है. जिसके बाद पुलिस ने अपनी रणनीति बदली और मो. इम्तियाज उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया. तब यह बात सामने आयी कि पुलिस के नजदीक रह कर पुलिस की हर गतिविधि जानता था और उसी अनुसार वह रंगदारी के लिए सब्जी विक्रेता को धमकाता था.
अमित व पवन मंडल भी थे मुखबिर
जेल में बंद कुख्यात अमित मंडल एवं पवन मंडल भी पहले पुलिस का मुखबिर हुआ करता था. कहा जाता है कि 8-10 साल पहले अमित मंडल जमालपुर थाना में मुखबिरी का काम करता था. एक थानेदार ने जमालपुर में अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण के लिए अमित मंडल को अपना मुखबिर बना लिया.
जिसके बाद वह जमालपुर के बड़े से लेकर छोटे अपराधियों को पुलिस को पकड़वाने का खेल प्रारंभ कर दिया. जबकि वह स्वयं अपना अपराध को चालू रखा. उसने मुखबिरी छोड़ कर अपराध की दुनिया में अपना दबदबा बनाने लगा. जिसके कारण उसके थाने में प्रवेश पर रोक लगा दिया गया. देखते ही देखते वह जमालपुर शहर का सबसे बड़ा डॉन बन गया. कासिम बाजार थाना क्षेत्र के बीचागांव निवासी पवन मंडल हथियार तस्करी के कारोबार करता था.
वह भी एसटीएफ का जहां मुखबिर बन गया, वहीं कासिम बाजार थाना के लिए भी खबरी का काम करने लगा. वह अपने प्रतिद्वंद्वी को पुलिस से पकड़वाने का खेल खेलने लगा. जबकि अपना धंधा वह चालू रखा. काफी दिनों बाद जब पुलिस को यह पता चला कि वह मुखबिरी के आरोप में हथियार तस्करी का धंधा बढ़ा दिया है तो उसके थाने में प्रवेश पर रोक लगा दिया गया. लेकिन तब तक वह अपना सत्ता कायम कर चुका था.

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