मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाख दावे के बावजूद जिले भर में मलेरिया व कालाजार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है़ जिले के कुल 230 गांव जहां मलेरिया से प्रभावित है, वहीं 34 गावों में कालाजार का प्रकोप फैला हुआ है़ ग्रामीण दहशत के माहौल में जी रहे हैं. सिर्फ इस वर्ष अगस्त माह तक जिले में कुल 118 मलेरिया तथा 13 कालाजार के मरीजों की पहचान हो चुकी है़ कालाजार व मलेरिया से बचाव को लेकर जागरूकता के नाम कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा. जिसके कारण ग्रामीण लगातार प्रभावित हो रहे हैं.
नहीं थमा मलेरिया व कालाजार का प्रकोप
मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाख दावे के बावजूद जिले भर में मलेरिया व कालाजार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है़ जिले के कुल 230 गांव जहां मलेरिया से प्रभावित है, वहीं 34 गावों में कालाजार का प्रकोप फैला हुआ है़ ग्रामीण दहशत के माहौल में जी रहे हैं. सिर्फ इस वर्ष […]

जागरूकता के मामले में पिछड़ रहा विभाग: कालाजार व मलेरिया को लेकर आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है़ किंतु इस मामले में स्वास्थ्य विभाग पिछड़ा हुआ है़ पिछले दिनों कालाजार से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता रैली निकाली, जो प्रभावित इलाके में जाकर प्रचार-प्रसार किया़ किंतु यह उतना कारगर साबित नहीं हो पा रहा़ खास कर प्रभावित इलाके में आम जनों के बीच जागरूकता के लिए न तो कोई होर्डिंग लगायी गयी है और न ही कहीं पर दीवार लेखन किया गया है़ ऐसे में जब आम जन जागरूक ही नहीं होंगे तो इस तरह की संक्रामक बीमारियां फैलती ही रहेंगी़
बचाव के तरीके व सावधानी: मलेरिया से बचाव के लिए मच्छर-दानी लगाकर सोएं, घर के अंदर मच्छर मारने वाली दवा छिड़कें, घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगायें. हलके रंग के कपड़े पहनिए जिनसे आपका शरीर पूरी तरह ढका हो. ऐसी जगह पर मत जाइए, जहां झाड़ी हों क्योंकि वहां बहुत मच्छर होते हैं, या जहां पानी इकट्ठा हो क्योंकि वहां मच्छर पनपने का खतरा होता है. अगर आपको मलेरिया हो गया है, तो फौरन इलाज करवायें. किसी संक्रमित मच्छर के काटने से एक व्यक्ति में मलेरिया के रोगाणु आ सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ, एक संक्रमित व्यक्ति को काटने से एक मच्छर में मलेरिया के रोगाणु आ सकते हैं. उसके बाद अगर वह मच्छर किसी दूसरे इंसान को काटे, तो उसे भी मलेरिया हो सकता है.
कहते हैं चिकित्सक
डॉ के रंजन ने बताया कि मलेरिया परजीवी रोगाणु से होता है, जिसे प्लास्मोडियम कहते हैं. ये रोगाणु एनोफेलीज़ जाति के मादा मच्छर में होते हैं और जब यह किसी व्यक्ति को काटती है, तो उसके खून की नली में मलेरिया के रोगाणु फैल जाते हैं. ये रोगाणु व्यक्ति के कलेजे की कोशिकाओं तक पहुंचते हैं और वहां इनकी गिनती बढ़ती है. जब कलेजे की कोशिका फटती है, तो ये रोगाणु व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करते हैं. वहां भी इनकी गिनती बढ़ती है. जब लाल रक्त कोशिका फटती है, तो रोगाणु दूसरी लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करते हैं. रोगाणुओं का लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने और कोशिकाओं के फटने का सिलसिला जारी रहता है. जब भी लाल रक्त कोशिका फटती है, तो व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण नजर आते हैं. वहीं कालाजार तो सिर्फ बालू मक्खी के काटने से होती है़
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने बताया कि कालाजार व मलेरिया के रोकथाम के लिए लगातार प्रभावित इलाके में छिड़काव तथा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है़ इलाज के लिए अस्पतालों में दवा व जांच किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है़ं
आठ माह में कालाजार के 13 व मलेरिया के 118 रोगी
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले आठ महीने में जिले के अलग-अलग हिस्सों से मलेरिया के कुल 118 मरीज पाये जा चुके हैं. वहीं कालाजार के 13 रोगी मिले हैं. बताया जाता है कि जिले के हवेली खड़गपुर व धरहरा प्रखंड के 230 गांव की कुल 23379 आबादी मलेरिया से तथा मुंगेर सदर, जमालपुर, धरहरा, बरियारपुर, हवेली खड़गपुर व टेटियाबंबर के 34 गांव की कुल 74986 आबादी कालाजार से प्रभावित है़
कालाजार की पहचान
कालाजार मादा बालू मक्खी (सैंड फ्लाइ ) के काटने से होता है. इस बीमारी में लंबे समय तक बुखार रहता है. सामान्य उपचार से कालाजार ठीक नहीं होता है. इस बीमारी में खून की कमी हो जाती है, जिससे वजन घटने लगता है. त्वचा का रंग भी काला पड़ने लगता है.
क्या है मलेरिया
मलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो परजीवी रोगाणु की वजह से होती है. ये रोगाणु इतने छोटे होते हैं कि हम इन्हें देख नहीं सकते. मलेरिया के लक्षण हैं बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मितलना और उलटी होना. कभी-कभी इसके लक्षण हर 48 से 72 घंटे में दोबारा दिखायी देते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि एक व्यक्ति को कौन-से परजीवी की वजह से मलेरिया हुआ है और वह कब से बीमार है.