डायरिया के इलाज को लेकर सदर अस्पताल में नहीं है मुकम्मल व्यवस्था, मरीजों को हो रही परेशानी

मुंगेर : एक ओर जहां उमस भरी गर्मी के कारण डायरिया का प्रकोप काफी बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल में डायरिया के मरीजों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है़ इस कारण मरीजों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है़ हाल यह है कि सदर अस्पताल प्रबंधन डायरिया के मरीजों […]

मुंगेर : एक ओर जहां उमस भरी गर्मी के कारण डायरिया का प्रकोप काफी बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल में डायरिया के मरीजों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है़ इस कारण मरीजों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है़ हाल यह है कि सदर अस्पताल प्रबंधन डायरिया के मरीजों को बेड तक उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है़

अस्पताल में बदहाली इस कदर है कि मरीजों का इलाज फर्श पर ही किया जा रहा है़ जबकि सदर अस्पताल में अब भी बेड व जगहों की कमी नहीं है़ बावजूद अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह से बेपरवाह बनी हुई है़

डायरिया पीड़ित का इलाज फर्श पर
सदर अस्पताल का नाम सुनते ही संक्रमण का भयावह दृश्य सामने आ जाता है़ जहां जगह-जगह पर गंदगी व संक्रामक वस्तु फैली रहती है़ बावजूद अस्पताल प्रबंधन मरीजों को संक्रमण से बचाने के बजाय उसे संक्रमण के मुंह में ढकेल रही है़ जहां डायरिया से पीड़ित मरीजों को बेड के बदले फर्श पर ही इलाज किया जा रहा है़ सोमवार को अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय के समीप कई डायरिया पीड़ित मरीजों का इलाज खुलेआम फर्श पर किया जा रहा था़
सदर प्रखंड के तौफिर गांव निवासी रामवदन यादव की पत्नी मौसमी देवी ने बताया कि उसने जब बेड की मांग की तो उसे बताया गया कि वार्ड में सभी बेड भर गया है़ इलाज कराना है तो फर्श पर ही लेट कर करना होगा़ वहीं सफियाबाद निवासी विजय साव की पत्नी रजनी देवी ने बताया कि काफी कहने के बाद उसे फर्श पर बिछाने के लिए एक चादर मिला़ जबकि तीन नंबर गुमटी निवासी बेचन साव की पत्नी संगीता देवी को बिना गद्दे वाले बेड पर ही लिटा कर इलाज किया जा रहा है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि मरीजों को हर हाल में बेड उपलब्ध कराया जायेगा़ उन्होंने खुद से मामले की पड़ताल करने की बात कही़
बढ़ा प्रकोप, व्यवस्था मुकम्मल नहीं
पिछले दो दिनों से डायरिया का प्रकोप काफी बढ़ गया है़ सोमवार को सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर पुरुष सर्जिकल वार्ड, पुरुष मेडिकल वार्ड तथा आईसुलेशन वार्ड में दो दर्जन से भी अधिक मरीज भरती पाये गये़ आम तौर पर यह सबको पता होता है कि बरसात के दिनों में डायरिया का प्रकोप काफी बढ़ जाता है़ जिसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को पहले से ही मुकम्मल व्यवस्था रखनी चाहिए़ किंतु सदर अस्पताल में इन बातों का कोई मायने रही रखा जाता है़ मालूम हो कि सदर अस्पताल के पुराने इमरजेंसी वार्ड में डायरिया पीड़ित मरीजों के लिए आराम से आठ बेड लगाये जा सकते हैं. अस्पताल में बेडों की भी कोई कमी नहीं है़ अब भी अस्पताल उपाधीक्षक के आवास में कई बेड जंग खा रहा है, जिसका इस्तेमाल वर्तमान समय में किया जा सकता है़ किंतु अस्पताल प्रबंधन को शायद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल रही है या नहीं.

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