छात्राअों ने किया खुशी का इजहार
मुंगेर : सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक की वैधानिकता पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाया. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेएस खेहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन वाली पांच सदस्यीय पीठ ने फैसला में तीन तलाक को अवैधानिक करार दिया है. इस मुद्दे पर प्रभात खबर की टीम ने मुस्लिम समुदाय के इमाम, बुद्धिजीवी तथा महिलाओं से बात की. जिस पर महिलाओं ने तो खुशी का इजहार किया, किंतु कई लोगों ने आपत्ति भी जतायी़
महिलाओं में खुशी का माहौल: तीन तलाक पर आये फैसले के बाद महिलाओं में काफी खुशी का माहौल है़ इसकी झलक मंगलवार को बीआरएम कॉलेज में भी देखा गया़ जहां मुस्लिम छात्राएं अपने हाथ से विक्ट्री का प्रतीक बना कर खुशी का इजहार कर रही थी़ं बड़ी बाजार निवासी आरसी परवीन, रिंकी परवीन, हजरतगंज निवासी नेहा परवीन, तबस्सुम आरा, मुर्गियाचक निवासी आफरीन, मुमताज मार्केट निवासी निखत परवीन, मिर्जापुर बरदह निवासी नुजहत परवीन, रुही नाज, शाहिस्ता परवीन व नरगिश फातिमा ने कहा कि छोटी-छोटी बात पर महिलाओं को तीन तलाक का सामना करना पड़ता था़ लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐतिहासिक फैसले आने के बाद सरकार महिलाओं के बेहतरी के लिए कानून बनायेगी़ जिससे महिलाएं अकारण तीन तलाक का शिकार होने से बच जायेगी़ एक तरह के फैसले और पहले आ जाने चाहिए थे़ छात्राओं ने फैसले का स्वागत किया गया है़
…अौर जतायी नाराजगी भी
शरीयत करे तय
तोपखाना बाजार स्थित जामा मस्जिद के इमाम मो रागिब ने कहा कि तलाक शरीयत का मसला है, उसमें कानून की दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए. तलाक के मामले में शरीयत को तय करना है कि तीन तलाक जायज है या नहीं. इस्लाम से जुड़े मसले में सरकार को जबरन कुछ भी थोपना चाहिए. उन्होंने बताया कि वे फौजदारी कानून हो तहे दिल से मानते हैं. किंतु शरीयत में कानूनन बदलाव को स्वीकार नहीं होगा.
तीन तलाक का कानून रहे कायम
अंजुमन मुफीदुल इस्लाम के संयोजक निशार आसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि यह फैसला इस्लामिक कानून के विरोध में है़ कुरान में तो पहले से ही कानून बना हुआ है़ किसी भी सरकार को इस्लाम के कानून को बदलना नहीं चाहिए. यह फैसला मुस्लिम समुदायों के लिए काफी हानिकारक है़ तीन तलाक के लिए जो कानून पूर्व से बना हुआ है वह कायम रहना चाहिए़
