एनजीओ से बिना सहमति लिये ही नशामुक्ति केंद्र के वार्ड एटेंडेंट को लगा दिया आइसीयू की भी ड्यूटी पर
मुंगेर : मुंगेर सदर अस्पताल में संचालित आइसीयू सेवा नशामुक्ति केंद्र के कंधों पर चल रही है. इसके कारण धीरे-धीरे नशामुक्ति केंद्र अपना अस्तित्व को खोता जा रहा है. हाल यह है कि आइसीयू के लिए आज तक वार्ड एटेंडेंट की भी व्यवस्था नहीं हो पायी है़ यहां जितने भी बेड लगे हुए हैं, वे नशामुक्ति केंद्र के ही है़ं ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिस उद्देश्य से सूबे के मुख्यमंत्री ने लाखों रुपये खर्च कर नशामुक्ति केंद्र की स्थापना करवायी, वह यहां कागजों पर सिमटता चला जा रहा है. सदर अस्पताल में अब नशामुक्ति केंद्र सिर्फ नाम का रह गया है़ इसके हर संसाधन तथा कर्मचारियों का उपयोग अब आइसीयू सेवा के लिए ही किया जा रहा है़
आइसीयू का सारा बोझ नशामुक्ति केंद्र पर लाद दिया गया है़ पहले तो आइसीयू सेवा आरंभ किये जाने के नाम पर नशामुक्ति केंद्र के पुरुष विभाग वाले भवन पर कब्जा कर लिया गया़ अब नशामुक्ति केंद्र के कर्मचारियों की ड्यूटी भी आइसीयू में ही ली जा रही है़ यहां तक कि इलाजरत नशेड़ियों के मनोरंजन के लिए लगाया गया एलइडी टीवी, एसी तथा बेडों का भी उपयोग आइसीयू में ही हो रहा है़
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक: अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में कर्मचारियों की काफी कमी है़ यहां जो भी स्टाफ उपलब्ध हैं, उन्हीं से किसी तरह आइसीयू में भी काम लिया जा रहा है़ नशामुक्ति केंद्र के लिए अब भी एक भवन अलग से है़ आइसीयू सेवा आरंभ करने से नशामुक्ति केंद्र पर कोई बोझ नहीं पड़ा है़
वार्ड एटेंडेंट से ली जा रही दोहरी सेवा
नशामुक्ति केंद्र में भरती मरीजों के देखभाल के लिए एक अक्टूबर 2016 को ज्ञान भारती एनजीओ के माध्यम से कुल आठ वार्ड एटेंडेंट की पोस्टिंग की गयी, पर आइसीयू सेवा आरंभ होते ही नशामुक्ति केंद्र के वार्ड एटेंडेंट से ही आइसीयू में भी सेवा ली जाने लगी. इतना ही नहीं उन सभी वार्ड एटेंडेंट के नाम का ड्यूटी रोस्टर भी आइसीयू में चिपका दिया गया है़ अस्पताल प्रबंधन तथा एनजीओ की मिली भगत से वार्ड एटेंडेंट दोहरी सेवा देने को विवश हैं. ज्ञान भारती एनजीओ के संचालक अरुण सिंह ने बताया कि उनके सहमति के बिना ही नशामुक्ति केंद्र के वार्ड एटेंडेंट को आइसीयू सेवा में ड्यूटी लगा दी गयी है़
