मुंगेर : मुंगेर के बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना दिखा कर एक बार फिर ठगी का मामला सामने आया है. शहर के बड़ा बाजार स्थित कोचिंग संस्थान इंपल्स एकेडमी ने लाखों की ठगी की है. छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से रुपये वसूलने के बाद कोचिंग संस्थान को न सिर्फ बंद कर दिया गया. बल्कि जिस भवन में संस्थान चल रहा था, वहां से उसके बोर्ड भी हटा लिये गये. कोचिंग संचालक का मोबाइल भी स्विच ऑफ है और अभिभावक परेशान हैं कि आखिर वे अपने बच्चों को किस प्रकार बेहतर शिक्षा दिलायें.
मुंगेर : इंपल्स एकेडमी में ताला, लाखों लेकर संचालक फरार
मुंगेर : मुंगेर के बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना दिखा कर एक बार फिर ठगी का मामला सामने आया है. शहर के बड़ा बाजार स्थित कोचिंग संस्थान इंपल्स एकेडमी ने लाखों की ठगी की है. छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से रुपये वसूलने के बाद कोचिंग संस्थान को न सिर्फ बंद कर दिया गया. […]

मुंगेर में लगातार शिक्षा के नाम पर बच्चे ठगी के शिकार हो रहे हैं. राज्य सरकार ने कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए निबंधन का प्रावधान किया है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही व भ्रष्ट नीति के कारण वह लागू नहीं हो पा रहा है. कुछ माह पूर्व ही मुंगेर शहर के बड़ा बाजार में एक अवकाश प्राप्त पुलिस उपाधीक्षक के मकान में इंपल्स एकेडमी नामक कोचिंग संस्थान खोला गया. शहर के दर्जनों प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग व बैनर लगाये गये.
आइआइटी व मेडिकल की तैयारी का भरोसा दिला कर दसवीं व 11वीं पास बच्चों का एडमिशन लिया गया. कोचिंग संचालक ने एक वर्ष के लिए 36 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया तथा पहले स्टॉलमेंट के रूप में 12-12 हजार रुपये की वसूली की. यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से लाखों रुपये वसूली के बाद ईद के मौके पर जो संस्थान में छुट्टी दी गयी, तो पुन: कोचिंग का ताला खुला ही नहीं. पढ़ने वाले बच्चे व अभिभावक कोचिंग खुलने का इंतजार कर ही रहे थे कि संचालक ने भवन से अपना बोर्ड भी हटा लिया. अब अभिभावक परेशान हैं कि आखिर वे क्या करें. कई माह गुजर चुके है और अच्छे इंस्टीट्यूट में अब उन्हें दाखिला भी मिलना मुश्किल है.
ठगी : इंपल्स एकेडमी…
परेशान हैं अभिभावक : मुंगेर शहर के शास्त्री नगर निवासी एक अभिभावक ने बड़े ही सपना संजोये अपनी पुत्री का नामांकन इंपल्स एकेडमी में कराया था. उनकी पुत्री को सीबीएसइ की दसवीं बोर्ड परीक्षा में 10 सीजीपीए आया और वे इसी कोचिंग संस्थान के भरोसे अपनी पुत्री को पढ़ना चाहते थे. लेकिन, अचानक कोचिंग बंद हो जाने से वे परेशान हैं. क्योंकि उन्होंने प्रथम किस्त के रूप में 12 हजार रुपये का भुगतान भी किया था. अब वे अपनी बच्ची को बाहर भेजने में लगे हैं.
बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर बनाने का सपना दिखा कर ठगी कर रहे कोचिंग संचालक