सुशासन की आस. निगम की नयी नगर सरकार के लिए काम का अंबार
नगर की नयी सरकार का गठन हो चुका है. मुंगेर के लोगों को उनसे बड़ी आस बंधी है. सफाई, पेयजल व सुरक्षा का मसला गंभीर है. इसे सुलझाने के लिए अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है.
मुंगेर : मुंगेर नगर निगम के नयी सरकार का गठन हो चुका है और इस सरकार के कंधे पर जहां एक ओर नगर के चहुंमुखी विकास की बड़ी जिम्मेदारी है, वहीं आम जनता को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना निगम प्रशासन की प्राथमिकता होगी. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती नगर निगम को माफिया राज से मुक्ति दिलानी होगी. क्योंकि पिछले एक दशक में निगम पूरी तरह माफियाओं के चंगुल में जकड़ चुका है. चाहे वह सफाई माफिया हो या फिर भू-माफिया. मुंगेर में पूर्व में भी सफाई घोटाला हो चुका है.
जिसमें स्कूटर पर कूड़े की ढुलाई की गयी थी. इस प्रकार का घोटाला आज भी जारी है लेकिन घोटालेबाजों ने अपना तरीका बदल लिया है. ऐतिहासिक नगरी मुंगेर जब नगर परिषद से नगर निगम का दर्जा प्राप्त किया तो लोगों को बड़ी उम्मीदें जगी. शहरवासियों को लगा कि उनके नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा, मुंगेर शहर क्लीन व ग्रीन होगा, सुंदर पार्क होंगे और लोगों को शुद्ध आब-अो-हवा मिलेगी. लेकिन समय बीतने के साथ ही शहरवासियों के सपने चूर-चूर हो गये. शहरवासियों ने जिनके कंधों पर नगर के विकास की जिम्मेदारी सौंपी. वे सिर्फ और सिर्फ अपने विकास में ही रम गये. निवर्तमान नगर निगम बोर्ड ने मुंगेर शहर में विकास की ऐसी लकीर खींची जो कुछ क्षेत्रों में ही सिमट कर रह गया. शहर का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाया. आम जनता समस्याओं के बोझ तले दबते गये.
निगम में रहा है माफिया राज: नगर निगम मुंगेर में पूरी तरह माफिया राज रहा है. फलत: शहर के सड़कों पर गंदगी का ढेर, बजबजाती नालियां, पानी के लिए जद्दोजहद व टूटी सड़कें शहर की पहचान बन गयी. शहर की सफाई को लेकर निगम ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये और शहर को क्लीन करने का संकल्प लिया. जिसके तहत एक ओर जहां नगर निगम के कुल 45 वार्डों को तीन भागों में विभक्त कर कचड़ा उठाव की व्यवस्था की गयी. वहीं दूसरी ओर डोर टू डोर कचरा उठाव की व्यवस्था प्रारंभ हुई. लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कारण दोनों की व्यवस्था शहर को गंदगी मुक्त नहीं कराया पाया. डोर टू डोर कचरा संग्रह जहां कुछ खास घरों तक सिमट कर रह गया, वहीं कचरा उठाव व्यवस्था फ्लॉप साबित हुई है. सफाई माफियाओं ने 15-15 वार्डों में कूड़ा उठाव को लागू नहीं होने दिया और एक ही एजेंसी आज भी कूड़ा उठाव का कार्य कर रहा है. यहां तक की नगर विकास एवं आवास विभाग ने निगम के ट्रैक्टर व जेसीबी सहित अन्य वाहनों में गत वर्ष ही जीपीएस लगाने का निर्देश दिया था. काफी जद्दोजहद के बाद गत माह जीपीएस तो वाहनों में लगा दिया गया लेकिन उसे सर्वर से अब तक नहीं जोड़ा जा सका. अलबत्ता कूड़ा उठाव 40 ट्रैक्टर और बिल का भुगतान प्रतिदिन 70 ट्रैक्टर का खेल अनवरत जारी है.
निगम की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा
नये नगर सरकार की एक बड़ी चुनौती निगम को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्ति दिलाना होगा. एक ओर जहां बड़ी संख्या में प्रभावशाली व दबंग लोगों ने निगम के भूमि पर कब्जा जमा रखा है, वहीं कई दबंगों द्वारा उसकी बिक्री भी की जा रही है. शहर के मुख्य बाजार से लेकर विभिन्न मुहल्लों में नगर निगम की जमीन है. इस पर भू-माफिया कब्जा किये हुए है. कब्जा का हाल यह है कि मेयर के वार्ड संख्या 32 में अड़गरा के भूमि पर दबंगों ने कब्जा जमा लिया है. जिसमें वाहन का गैरेज व गाय का खटाल खोल दिया गया है. इधर पूरबसराय एवं चुरंबा में भी नगर निगम के भूमि पर माफियाओं का कब्जा है. इस कब्जे से निगम के भूमि को मुक्त कराना नये नगर सरकार के लिए चुनौती होगी. बहरहाल निगम बोर्ड के स्थायी समिति के गठन और बोर्ड के बैठक के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी.
कहती हैं मेयर
महापौर रूमा राज का कहना है कि निगम के कार्य संस्कृति को बदला जायेगा. यहां किसी भी हाल में माफिया राज नहीं चलेगा. शहर के प्रबुद्ध जन एवं वार्ड पार्षदों के सहयोग से नया बोर्ड जनआकांक्षाओं पर खड़ा उतरने का प्रयास करेगा.
