आशंका. पिछले दो दिनों से स्थिर है जल स्तर
मुंगेर : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा का जल स्तर गंगा दशहरा के दिन से ही बढ़ना आरंभ हो जाता है, पर इस बार गंगा मौन बनी हुई है़ हालांकि गंगा के मौन रूप को भी खतरनाक ही माना जाता है़ क्योंकि जब-जब गंगा का जल स्तर कुछ दिनों तक स्थित रहता है, तो उसके […]
मुंगेर : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा का जल स्तर गंगा दशहरा के दिन से ही बढ़ना आरंभ हो जाता है, पर इस बार गंगा मौन बनी हुई है़ हालांकि गंगा के मौन रूप को भी खतरनाक ही माना जाता है़ क्योंकि जब-जब गंगा का जल स्तर कुछ दिनों तक स्थित रहता है, तो उसके बाद जल स्तर में लगातार बढ़ोतरी होने लगती है़
पिछले पांच दिनों में गंगा के जल स्तर में कमी आने के साथ-साथ पिछले दो दिनों से जल स्तर बिलकुल स्थिर है़ इससे यह संभावना जतायी जा रही है कि जल्द ही अब गंगा का जल स्तर बढ़ने वाला है़
लगातार गंगा मचा रही तबाही: चार साल से मुंगेर में गंगा लगातार तबाही मचा रही है़ मालूम हो कि वर्ष 2013 में आयी बाढ़ ने जिले के लगभग दो दर्जन पंचायतों को भारी नुकसान पहुंचाया था़
वहीं पिछले साल आयी विनाशकारी बाढ़ ने 2013 से भी अधिक तबाही मचायी़ इसकी क्षति से अब तक पीड़ित परिवार उबर नहीं पाये हैं. इसके बावजूद जिले के तटबंधों की मरम्मती के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही हो रही है़
आपदा प्रबंधन द्वारा यदि जल्द ही तटबंधों की स्थिति को सुदृढ़
नहीं किया गया तो फिर से पिछले साल की स्थिति की पुनरावृत्ति होते देर नहीं लगेगी़
1976 की बाढ़ सबसे भयावह: 1976 में आयी बाढ़ को जिले में आयी सबसे भयावह बाढ़ कहा जाता है़ उस साल गंगा का जल स्तर 40.99 तक पहुंच गया था़ जबकि मुंगेर में गंगा के जल स्तर के खतरे का निशान 39.33 मीटर अंकित है़ यहां 37 मीटर के बाद ही बाढ़ का तांडव नजर आने लगता है़ खास कर दियारा क्षेत्रवासियों को तो 37 मीटर तक जल स्तर पहुंचने के पहले ही अपना घर- बार छोड़ना पड़ जाता है़