Motihari: चकिया. स्थानीय इमादपट्टी में सोमवार को जिला स्तरीय संगोष्ठी एवं काव्यपाठ का आयोजन किया गया. हिंदी उर्दू अकादमी नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कायदे उर्दू शमीम अहमद ने तथा संचालन उर्दू अनुवादक, गुलाम रब्बानी मिस्बाही ने किया. शमीम अहमद ने कहा कि उर्दू और हिंदी हमारे देश की सबसे महत्वपूर्ण भाषाए्रं हैं. भाषा का कोई धर्म नहीं होता.अंग्रेजों ने इन भाषाओं को धर्म से जोड़ कर हमारे बीच धार्मिक नफरत फैलाने का प्रयास किया. इसलिए हमारा संगठन इन भाषाओं पर लगे धार्मिक लेबल को मिटाने के लिए आंदोलन चलाएगा. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि हिंदी को राष्ट्रभाषा और उर्दू को द्वितीय राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए. मुहम्मद दलशाक ने कहा कि हम उर्दू भाषा को खुद से दूर कर रहे हैं.फरोग आलम जामी ने कहा कि कई स्कूलों में उर्दू शिक्षक नहीं हैं.खासकर मिल्लत हाई स्कूल उर्दू स्कूल होने के बावजूद उर्दू शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है. शुजा गांधी ने कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य का प्रचार और प्रसार हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.डॉ वलीउल्लाह कादरी, व्याख्याता, राजकीय महाविद्यालय, छपरा ने कहा कि गुलाम सरवर का आंदोलन अपनी जवानी में था तब चंपारण की धरती से मौलाना बेताब सिद्दीकी इस भाषा को विकसित कर रहे थे. काव्य पाठ के दौरान जफर हबीबी, रूह-उल-हक हमदम, समीउल्लाह चम्पारणी, सईद अहमद कादरी, डॉ. ताहिरुद्दीन ताहिर, वारिस इस्लाम पुरी, डॉ. सबा अख्तर शोख, हिदायतुल्लाह अहसन चम्पारणी, आकिब चिश्ती, मेहबूब शबनम मेहस्वी, मुजीब-उर-रहमान मुजीब ने अपनीप्रस्तुति से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया. इस मौके पर मौलाना मंजर हुसैन रिजवी, मौलाना अली रजा, मुहम्मद जवाद आलम, डॉ. अब्दुल रहमान, मेराज अहमद, हाफिज अब्दुल मुबीन, मुफ्ती रजाउल्लाह नक्शबंदी , मौलाना सैयद अकरम नूरी समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.
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