मोतिहारी . शहर के अगरवा जामा मस्जिद के इमाम मो- मकशुद आलम ने रमजानुल मुबारक के पवित्र महीने के बारे में कहा की रमजानुल मुबारक का तीसरा अशरा शुरू हो चूका है. यह अशरा जहन्नम से आज़ादी के एतबार से और एतेकाफ और शबे क़द्र के एतेबार से खाश अहमियत वाला है इस अशरा में शबे कदर है जिसको कुरान शरीफ में हजार महीना से बेहतर बताया गया है.अल्लाह तबारक व् तआला ने शबे कदर की फजीलत में पूरी एक सुरह कुराने करीम में नाजिल फरमा दी है इस एक रात में अगर किसी ने इबादत कर ली यानी अगर किसी को एक शबे कदर भी नसीब हो गयी तो गोया उसको तेरासी साल चार माह से ज्यादा ज़माना इबादत में गुजरने का शबाब हासिल हो गया और हदीश में मेरे आका हुजार स.अ.व्.स. ने उसकी बहुत फजीलत बयान फरमाई है. सैयद बुखारी शरीफ की एक हदीश है जिसमे कहा गया है की हुजुर स.अ.व्.स. ने इरशाद फरमाया है जो शख्स शबे कदर में ईमान के साथ और सवाब की उम्मीद से इबादत करता है नमाजे पढ़ता है दुआ करता है कुराने करीम की तिलावत करता है जिक्र व् अजकार में रात गुजरता है तो अल्लाह उसके पिछले तमाम गुनाहों को माफ़ फरमा देता है लेकिन यह रात जब इतनी कीमती है तो उसको तलाश करनी पड़ती है तलाश के सिलसिले में हदीस पाक में आया है हजरत आयशा र.अ.अ.ने बयान फरमाई है की हुजुर स.अ.व्.स. ने बयान फरमाया के शबे कदर को रमजान के आखरी अशरा के पाक रातो में तलाश करो लिहाजा मुसलमानों को चाहिए की 21 वी शब्,23 वी शब्,25वीं शब्,27 वी शब् और 29 वी शब् में तलाश करो यानी इन रातो जग कर ज्यादा से ज्याद इबादत की जाय और अल्लाह को राजी की जाय, साथ ही इन इबादतों के दौरान अल्लाह से दिल की तमाम वाजिब दुआए मांगी जाय, जिनमे देश की तरक्की,आपसी भाईचारा के साथ अमन चैन की दुआए की जाय क्योकि अल्लाह को अपने बन्दों के दुवाओं पर खाश ख्याल होता है वैसे वाजिब दुवाओं को वो कुबूल करता है और खुश होता है. .
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
