मोतिहारी. नवरात्र आरंभ होने के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिरों व पूजा पंडालों में कलश की स्थापना हुई.कुछ भक्त अपने घरों भी कलश की स्थापना कर विधि विधान से पूजा में जुटे रहे .आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, सोमवार को घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ गजकेसरी, बुधादित्य, शुक्ल और ब्रह्म योग जैसे शुभसंयोगों में हुआ. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, माता दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो सुख-समृद्धि, वर्षा और कल्याण का प्रतीक माना गया है. नवरात्रि के पहले दिन से ही घरों, मंदिरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना कर श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड और दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ शुरू किया. विद्वानों के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की आराधना करने से शक्ति, बुद्धि, ऐश्वर्य और रोग-शोक से मुक्ति की प्राप्ति होती है. इस बार चतुर्थी तिथि 25 और 26 सितंबर दोनों दिन रहेगी, जिसके कारण कुष्मांडा माता की पूजा दो दिन की जाएगी.
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