भारतीय ज्ञान परंपरा से सीख लेकर नवाचार के नए प्रतिमान गढ़ें शोधार्थी : कुलपति

केविवि के पंडित मदन मोहन मालवीय वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय द्वारा “परंपरा और नवाचार का मिलन – वाणिज्य और प्रबंधन में भारतीय ज्ञान की खोज विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी मंगलवार को संपन्न हुई .

मोतिहारी.केविवि के पंडित मदन मोहन मालवीय वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय द्वारा “परंपरा और नवाचार का मिलन – वाणिज्य और प्रबंधन में भारतीय ज्ञान की खोज विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी मंगलवार को संपन्न हुई .विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों व शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा से सीख लेकर नवाचार के नए प्रतिमान गढ़ें. उन्होंने कहा, “भारतीय दर्शन व प्रबंधन का समन्वय न सिर्फ हमारी विरासत को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मार्ग भी प्रशस्त करता है.मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. बलवंत सिंह (जेएन पी.जी. कॉलेज, लखनऊ) ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में वाणिज्य व प्रबंधन के कई सूत्र मौजूद हैं, जिनका उपयोग आधुनिक समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में किया जा सकता है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन परंपरागत सिद्धांतों को समझकर नवाचार के साथ लागू करें, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत का योगदान और अधिक सुदृढ़ हो सके.ऑनलाइन माध्यम से जुड़े प्रो. सुबोध केम्पराजु (इग्नू) और डॉ. फ्रांसिस हरमावाना (हेड, डीईएसएच, इंडोनेशिया) ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों के नेतृत्व और संगठनात्मक विकास में प्रभाव पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन का वैश्विक प्रबंधन पद्धतियों पर सकारात्मक असर देखा जा सकता है, बशर्ते इसे सही संदर्भ में समझा और अपनाया जाए. प्रो.प्रसून दत्त सिंह ने भारतीय प्रबंधन दृष्टिकोण में नैतिकता एवं व्यवहारिक ज्ञान के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि “भारतीय परंपरा में निहित समग्रता का दृष्टिकोण आधुनिक प्रबंधन के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है. डॉ. सपना सुगंधा ) ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों व आयोजन समिति के सदस्यों का आभार प्रकट किया.

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Published by: Satendra prasad sat

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