Motihari News: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के क्रियान्वयन में पूर्वी चंपारण आईसीडीएस का प्रदर्शन राज्य के सभी 38 जिलों में सबसे कमजोर पाया गया है. महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 5 अगस्त 2026 तक जारी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट में जिले को पंजीकरण और नामांकन दोनों प्रमुख मानकों पर 38वां स्थान मिला है. इससे योजना के क्रियान्वयन की गति और पात्र लाभार्थियों तक इसका लाभ पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
पंजीकरण में भी पूर्वी चंपारण 38वें स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी चंपारण के 5,598 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 39,186 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके मुकाबले अब तक केवल 6,700 लाभार्थियों की प्रविष्टि यानी पंजीकरण हो सका है. यह लक्ष्य का महज 17.10 प्रतिशत है. इस मानक पर भी जिला राज्य के 38 जिलों में अंतिम पायदान पर है.
नामांकन की स्थिति और भी चिंताजनक
पीएमएमवीवाई में नामांकन की स्थिति पंजीकरण से भी कमजोर है. अब तक केवल 4,941 लाभार्थियों का नामांकन हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य का मात्र 12.61 प्रतिशत है. इस मानक पर भी पूर्वी चंपारण राज्य में 38वें स्थान पर है.
सुपौल 40 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि के साथ आगे
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में पंजीकरण और नामांकन की उपलब्धि 30 से 40 प्रतिशत के बीच पहुंच चुकी है. सुपौल 40.25 प्रतिशत पंजीकरण और 33.20 प्रतिशत नामांकन के साथ राज्य में पहले स्थान पर है. इसके मुकाबले पूर्वी चंपारण की उपलब्धि काफी कम है.
लाभार्थियों तक योजना पहुंचाने की चुनौती
पीएमएमवीवाई का उद्देश्य पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को निर्धारित शर्तों के तहत सहायता उपलब्ध कराना है. ऐसे में लाभार्थियों की पहचान, पंजीकरण और नामांकन की धीमी गति से पात्र महिलाओं को समय पर योजना का लाभ मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
प्रदर्शन सुधारना विभाग के सामने बड़ी चुनौती
पूर्वी चंपारण आईसीडीएस के कमजोर प्रदर्शन के बाद अब विभागीय अधिकारियों के सामने पंजीकरण और नामांकन की गति बढ़ाने की चुनौती है. आंगनबाड़ी केंद्रों के स्तर पर पात्र लाभार्थियों की पहचान और उन्हें योजना से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी होगा, ताकि जिले की स्थिति में सुधार हो सके.
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