रक्सौल. जिस प्रोजेक्ट से आम लोगों की भावना जूड़ी होती है, वैसे प्रोजेक्ट की फाइल में लगातार हो रही देरी से लोगों के अंदर असंतोष पैदा होता है. कुछ ऐसा ही मामला रक्सौल के रेलवे ओवरब्रिज से जूड़ा है. 21 साल से रक्सौल में ओवरब्रिज के निर्माण का इंतजार कर रहे, सीमावर्ती इलाके के लोगों ने यूपीए की सरकार को भी देखा है और अब एनडीए की भी सरकार है. सरकारें बदली, जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन ओवरब्रिज का इंतजार समाप्त नहीं हुआ. साल 2004 में केंद्र सरकार के तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रक्सौल में दो ओवरब्रिज निर्माण को लेकर शिलान्यास किया था. जिसके बाद लगभग 20 साल तक यह साफ नहीं हो पाया कि इस ओवरब्रिज के निर्माण के लिए फंड कहां से मिलेगा. स्थानीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल की माने तो वर्ष 2014 में एनडीए की सरकार आने के बाद उन्होंने रक्सौल के ओवरब्रिज के लिए फंड जारी कराया. इसके बाद अलगी समस्या एनओसी पर आकर अटक गयी. सांसद डॉ. जायसवाल के द्वारा लगभग 11 साल प्रयास करने के बाद वर्ष 2025 के मार्च में अंतिम तौर पर यह फैसला हुआ कि रक्सौल के दोनों रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण रेलवे के द्वारा कराया जायेगा और उसकी पूरी राशि भारत सरकार देगी. मार्च में जैसे ही यह खबर आयी, लोगों के अंदर ओवरब्रिज को लेकर नयी ऊर्जा का संचार हुआ. यह उम्मीद जगी कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव की घोषणा से रक्सौल ओवरब्रिज के निर्माण की फाइल गति लेगी और इसपर सार्थक काम शुरू हो सकेगा, वह भी तब जब 20 साल बाद इसके निर्माण की राह में आने वाली सभी तरह की अड़चन समाप्त हो गयी है. लेकिन, रक्सौल के लोगों का दुख यहीं खत्म नहीं और आज मार्च 2025 के बाद 6 माह से अधिक का समय बीत चुका है, रेलवे के सरकारी कार्यालय में रक्सौल ओवरब्रिज की फाइल किसी कोने में धूल फांक रही है. स्थानीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल लाख दावा करें, लेकिन हकीकत यही नजर आ रहा है कि रक्सौल में रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर पूर्व मध्य रेलवे समस्तीपुर मंडल के अधिकारी गंभीर नहीं है. पूर्व मध्य रेलवे के नव पदस्थापित मंडल रेल प्रबंधक से भी स्थानीय लोगों के द्वारा यह मांग की गयी है कि रक्सौल में ओवरब्रिज के निर्माण का कार्य जल्द शुरू किया जाये, लेकिन वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. राष्ट्रीय जनता रक्सौल के प्रखंड अध्यक्ष सौरंजन यादव व युवा नेता सैफूल आजम ने बताया कि एनडीए के जनप्रतिनिधियों को केवल झूठा आश्वासन देने की ट्रेनिंग दी जाती है. रक्सौल के लिए आज के समय में सबसे बड़ी समस्या ओवरब्रिज है, हर चुनाव में बीजेपी के लोग इसे अपने एजेंडा में रखते है, काम कभी नहीं होता है. 2025 में यह एक बड़ा मसला बनेगा और महागठबंधन लोगों के बीच ओवरब्रिज को लेकर इनके द्वारा किए गए झूठे दावों को लेकर जायेगी. वहीं समाजसेवी डॉ. शशि रंजन सिंह ने कहा कि यह समझ से परे है कि जब किसी एक विभाग को निर्माण का जिम्मा मिल गया, उसके बाद भी अभी तक इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पायी, रक्सौल और यहां आने वाले पर्यटकों के हित में ओवरब्रिज का निर्माण होना अत्यंत जरूरी है.
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