Motihari:गंभीर जटिलताओं को रोकने को प्रारंभिक चरण में ही प्रभावी उपचार जरुरी : सीएस

सदर अस्पताल परिसर स्थित पारा मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान सभागार में शुक्रवार को इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन्स (ईएमटी) को दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ.

Motihari: मोतिहारी.सदर अस्पताल परिसर स्थित पारा मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान सभागार में शुक्रवार को इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन्स (ईएमटी) को दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ. जिसमें बच्चों में होने वाली एक्यूट इन्सेफलाईटिस सिंड्रोम एईएस और जापानी इनसेफलाइटिस (जेई ) जैसे गंभीर रोगों के प्रारंभिक प्रबंधन की जानकारी दी गयी. यह प्रशिक्षण दो दिनों तक 3 एवं 04 अप्रैल को अलग अलग बैच को प्रशिक्षण दिया गया, ताकि समय रहते बच्चों में होने वाले इस गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा सके और मृत्यु दर में कमी लाई जा सके. मुख्य प्रशिक्षण जीएनएम निवेदिता हेंब्रम, अर्चना सिन्हा,पीरामल फाउंडेशन से मुकेश कुमार, राखी, भीडीसीओ रविंद्र कुमार ने दिया. प्रशिक्षण में ईएमटी को बच्चों का प्रारंभिक इलाज करने, उनके लक्षणों की पहचान करने, उचित प्राथमिक उपचार देने, समय पर एम्बुलेंस पहुंचाने, ऑक्सीजन की व्यवस्था करने, ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल चेक करने, मरीज का तापमान जांच, पल्स रेट, हृदय गति, बीपी, डीहाईडरेशन की स्थिति सहित कई जांच करने की ट्रेनिंग दी गयी. मौके पर सिविल सर्जन डॉ. रविभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रशिक्षण से रोगों के प्रारंभिक चरण में ही प्रभावी उपचार संभव होगा. जिससे गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकेगा और बच्चों की जान बचाई जा सकेगी. इस अवसर पर जिला महामारी नियंत्रण पदाधिकारी, जिला लेखा प्रबंधक आदि उपस्थित रहे.

इमर्जेंसी में हेल्पलाइन नंबर पर करे संपर्क

जिला स्तर पर इमर्जेंसी हेल्पलाइन नंबर 8544421334, 8544421335 जारी किया गया है. प्रशिक्षण में बताया गया की चिकित्सीय परामर्श में विलंब के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है. सामान्य उपचार एवं सावधानियों के बारे में बताया की अपने बच्चों को तेज धूप से बचाएं. अपने बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराए. वही गर्मी के दिनों में बच्चों को ओआरएस अथवा नींबू पानी-चीनी का घोल पिलाने व रात में बच्चों को भरपेट खाना खिलाने पर जोर दिया गया.

एइएस के दो व जेई के एक मरीज मिलें

जिले में एइएस के दो और जेइ के एक मरीज मिले है. जिनका उपचार सदर अस्पताल में किया गया. जो अब पूर्ण रूप से स्वस्थ है. चिकित्सकों ने लोगों को सतर्कता बरने की सलाह दी है. ऐसे में तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछे एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100°F से कम हो सके. पारासिटामोल की गोली/सीरप मरीज को चिकित्सीय सलाह पर दें.यदि बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ एवं पीने योग्य पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलायें।चमकी आने पर, मरीज को बाएं या दाएं करवट में लिटाकर ले जाएं. बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें. अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा हो तो साफ कपड़े से पोछें, जिससे कि सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो. बेहोशी व मिर्गी की अवस्था में बच्चे को छायादार एवं हवादार स्थान पर लिटाने की नसीहत दी है.

चमकी के दौरान नहीं करने की सलाह

बच्चे को कम्बल या गर्म कपडों में नही लपेटें और ना ही बच्चे की नाक बंद करें. बेहोशी व मिर्गी की अवस्था में बच्चे के मुंह से कुछ भी नहीं देने की सलाह है. बच्चे का गर्दन झुका हुआ नहीं रखें. यह दैविक प्रकोप नहीं है बल्कि अत्यधिक गर्मी एवं नमी के कारण होने वाली बीमारी है अतः बच्चे के इलाज में ओझा गुणी में समय नष्ट न करें. मरीज के बिस्तर पर ना बैठे तथा मरीज को बिना वजह तंग न करें. ध्यान रहें की मरीज के पास शोर न हो और शांत वातावरण बनाये रखें.

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By SATENDRA PRASAD SAT

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