मोतिहारी. रमजान के पवित्र महीने में 10 वां रोजा सोमवार मंगलवार को खत्म हों गया. इसके साथ ही पहला अशरा रहमत को हमारे बीच से रूखसत हो गया. बुधवार को ग्यारहवें रोजे के साथ मगफिरत का अशरा शुरू हो गया. मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का अशरा. दूसरे अशरे में रोजेदार अपने छोटे-बड़े गुनाहों की तौबा करते हैं. वे अल्लाह से माफी मांगते हैं. इस दौर में की गई इबादत और सच्चे दिल से की गई दुआओं को अल्लाह कबूल करते हैं. इस्लामिक स्कॉलर व जीवधारा बापूधाम चन्द्रहिया निवासी हकीम मोतिउल्लाह ने बताया कि मगफिरत के अशरे में गुनाहों की माफी के लिए तौबा करनी चाहिए. अल्लाह से अपनी गलतियों के लिए सच्चे दिल से दुआ करें. गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें. कुरआन की तिलावत करें और इबादत में अधिक समय दें. बताया कि रमजान का यह दौर आत्मशुद्धि का होता है. इसमें इंसान अल्लाह के सामने अपनी गलतियों को स्वीकार करता है. वह उनसे बचने का संकल्प लेता है. जो व्यक्ति सच्चे दिल से तौबा करता है, उसके पिछले सभी गुनाह माफ हो जाते हैं. इसलिए इस पाक माह का हर तरह से एहतराम करना चाहिए. रोजा रखने का मतलब केवल भूखे व प्यासे रहना नहीं,बल्कि इबादत करना है.
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