Motihari: चेहरा मासूम, पढ़ाई की उम्र में अय्यासी का चस्का

शक्ल से भोला-भाला दिखने वाला सत्यम सौरभ को पढ़ाई के उम्र में ही अय्यासी का चस्का लग गया.

Motihari: मोतिहारी.शक्ल से भोला-भाला दिखने वाला सत्यम सौरभ को पढ़ाई के उम्र में ही अय्यासी का चस्का लग गया. शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाला सत्यम किशोर अवस्था में ही साइबर क्राइम में कदम रखा. उसके पास घर से पुलिस को जो डायरी हाथ लगी है, इससे साफ होता है कि वह वर्ष 2016 से साइबर क्राइम कर रहा है. उस समय उसकी उम्र 15-16 के आसपास होगी. पुलिस के हत्थे चढ़ा सत्यम का राइट हैंड चांदमारी के सुमित भी कम नहीं. उसने पुलिस से कहा कि इच्छा है कि मेरी मौत सोने की पलंग पर हो. उसकी बातें सुन पुलिस भी हैरान रह गयी. उसने पुलिस से यह भी कहा कि आपलोग जहां सोचना बंद कर देते हैं, वहां से हमलोग सोचना शुरू करते हैं. पुलिस ने बताया कि सुमित का काम सिर्फ इतना था कि वह साइबर फ्रॉडों का पैसा सफेद करता था. वह बदमाशों द्वारा साइबर फ्रॉड से कमाये गये पैसों को यूएसडीटी में कंभर्ट करता था. उसने पुलिस को यह भी बताया कि उसके जैसा इस गिरोह में और लोग भी काम करते हैं, जो उससे भी ज्यादा कालेधन को सफेद बनाते हैं. उसने सबसे पहला नाम घोड़ासहन के पुरुषोत्तम का लिया. उसके बाद शहर के मीना बाजार के रहने वाले दयाशंकर, निखिल, साजिद, राजकिशोर आदि का नाम बताया. कहा कि उक्त सभी लोग साइबर फ्रॉड के पैसों को यूएसडीटी व क्रिप्टो करेंसी को कंभर्ट कर आरएसएन वेब के माध्यम से काला कारोबार करते है. पुलिस का कहना है कि 220-25 के उम्र वाले गिरोह के अधिकांश मेम्बरों के पास जो गाड़ी है, उसका लास्ट रजिस्ट्रेशन नम्बर 8055 है. जिसे सभी लोग 8055 को बॉस के रूप में नम्बर प्लेट पर अंकित करा उपयोग करते है. पूरे शहर में इस गैंग के लोगों को बॉस के नाम से जाना जाता है.

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Published by: Satendra prasad sat

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