Madhubani News : गर्मी में बच्चों में बढ़ जाता है डायरिया व डिहाइड्रेशन का खतरा

अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है.

मधुबनी.अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है. गर्मी लोगों के लिए किसी कहर से कम नहीं साबित हो रही है. एक ओर सुबह से ही तेज धूप और दूसरी ओर तेजी से बह रही पछिया हवा के थपेड़े शरीर को झुलसा रही है. ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही कई तरह की बीमारियों को न्योता दे सकता है. इस मौसम में लोगों को अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. खासकर छोटे बच्चों के मामले में तो यह और भी जरूरी है. ऐसे मौसम में शिशुओं और छोटे बच्चों में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है. डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन का खतरा उत्पन्न हो जाती है. समय पर इसका कुशल प्रबंधन नहीं होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है. डायरिया से संबंधित लक्षणों के प्रति जागरूक होकर इसके खतरे से आसानी से बचा जा सकता है. सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेकानंद पाल रंजन ने कहा कि वर्तमान समय में ओपीडी मे प्रतिदिन 40-50 बच्चे इलाज के लिए आते हैं. इसमें से 60-70 प्रतिशत बच्चे डायरिया से पीड़ित होते हैं. उन्होंने कहा कि इसमें 10 प्रतिशत बच्चों को ही भर्ती करने कि आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि आज कल लोग बीमारी को लेकर काफी सतर्क रहने लगे हैं. इमरजेंसी के डॉक्टरों की मानें तो इसके बाद भी सदर अस्पताल के इमरजेंसी में प्रतिदिन डायरिया के दो तीन मरीज इलाज के लिए आते हैं. इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भर्ती कर आवश्यक इलाज किया जाता है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके झा ने कहा कि शिशु वार्ड में प्रतिदिन डायरिया के 3-4 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है. आसानी से की जा सकती है डायरिया की पहचान सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके झा ने कहा कि डायरिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक है. शुरुआती लक्षणों के आधार पर आसानी से इसकी पहचान कर इसका कुशल प्रबंधन किया जा सकता है. लगातार पतला दस्त होना, दस्त के साथ उल्टी, भूख में कमी, दस्त के साथ हल्का बुखार आना, जटिल परिस्थितियों में दस्त के साथ खून आना इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है. रोग के शुरुआती दौर में ओआरएस का घोल इलाज में काफी मददगार होता है. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. साथ ही क्षेत्र की आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं से इसे बनाने की विधि की जानकारी आसानी से हासिल की जा सकती है. दूषित जल व स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी डॉ. डीके झा ने कहा कि डायरिया से बच्चों में कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इससे बचाव जरूरी है. गर्मी के मौसम में बच्चे अक्सर प्यास लगने पर कहीं भी पानी पी लेते हैं. इससे इंफेक्शन का खतरा होता है. दूषित जल का सेवन, साफ-सफाई की कमी इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं. इसलिए बच्चों को खाना खिलाने से पहले अच्छी तरह उनका हाथ धोएं, खाना बनाते व परोसते समय सफाई रखें, बच्चों को शौच के बाद साबुन से हाथ धुलने की आदत डायरिया से बचाव के लिहाज से जरूरी है. बच्चे को दस्त की समस्या होने पर किसी दवा से पहले उन्हें पानी की कमी से बचाएं. जीवन रक्षक घोल यानी ओआरएस पिलाएं. घर पर ही नींबू पानी में नमक व चीनी मिलाकर पिलाएं. लस्सी, छाछ, नारियल पानी भी दिया जा सकता है. हालत में सुधार नहीं होने पर तत्काल अपने नजदीकी अस्पताल से संपर्क करने की सलाह उन्होंने दी है.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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