Madhubani News: नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से ‘नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम’ (NNF) इंडिया के सहयोग से रविवार को देश भर में ‘एनआरपी दिवस’ मनाया गया. इस अवसर पर मधुबनी सदर अस्पताल के एमसीएच विंग में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को ‘गोल्डन मिनट्स’ यानी जन्म के तुरंत बाद के उन शुरुआती मिनटों के महत्व के बारे में प्रशिक्षित किया, जो किसी नवजात की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं.
जन्म के समय सांस न ले पाना मृत्यु का बड़ा कारण
एसएनसीयू के नोडल पदाधिकारी डॉ. विवेकानंद पाल ने बताया कि भारत में नवजात मौतों का एक मुख्य कारण जन्म के समय शिशु का सांस न ले पाना है. उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे बड़ा समन्वित प्रशिक्षण अभियान है, जो एनएनएफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. लल्लन कुमार भारती के नेतृत्व में चलाया जा रहा है. इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म के समय हर शिशु को प्रभावी ‘पुनर्जीवन सहायता’ (Resuscitation) मिल सके. सरल और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से रोकी जा सकने वाली इन मौतों को टाला जा सकता है.
एक ही दिन में बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके झा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे देश में कुल 998 केंद्रों पर यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें 20 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया. यह एक ऐतिहासिक कदम है जिसने एक ही दिन में सबसे अधिक नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण देने का रिकॉर्ड स्थापित किया है. सदर अस्पताल में आयोजित इस निःशुल्क कार्यशाला में दो दर्जन से अधिक सरकारी व निजी क्षेत्र के कर्मियों ने भाग लिया. विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक नवजात देखभाल सेवाओं को मजबूती मिलेगी.
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
