मधुबनी : जिले के तीन हजार एड्स पीड़ित मरीज हर माह करीब 70 लाख रुपये की दवा खा रहे हैं. इन मरीजों को इतने रकम की दवा मुफ्त में नाको द्वारा दिया जाता है. इसके अलावा सरकार द्वारा एचआइवी मरीजों को कई योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है. जिसमें परवरिश योजना, बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना श्रम कल्याण विभाग द्वारा कामगार योजना व एआरटी केंद्र से जुड़े एनजीओं द्वारा भी आर्थिक व चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करायी जाती है.
एड्स मरीजों को मुफ्त मिल रही हर माह 70 लाख की दवा
मधुबनी : जिले के तीन हजार एड्स पीड़ित मरीज हर माह करीब 70 लाख रुपये की दवा खा रहे हैं. इन मरीजों को इतने रकम की दवा मुफ्त में नाको द्वारा दिया जाता है. इसके अलावा सरकार द्वारा एचआइवी मरीजों को कई योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है. जिसमें परवरिश योजना, बिहार शताब्दी एड्स […]

2011 में हुई ए आरटी सेंटर की स्थापना . राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन नाको द्वारा वर्ष 2011 में सदर अस्पताल के ओपीडी में एआरटी केंद्र की स्थापना किया गया. जहां एचआइवी रोगियों को मुफ्त जांच, मुफ्त चिकित्सीय सुविधा के अलावा मुफ्त दवा देने की शुरुआत किया गया.
4500 मरीज पंजीकृत. वर्ष 2011 से वर्ष 2016 तक जिले में 4500 मरीज पंजीकृत किये गये है. एआरटी सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 से 2016 के बीच 350 एड्स पीड़ित मरीजों की सामान्य मौत हुई है. 3 हजार मरीजों को प्रतिमाह मुफ्त दवा दी जाती है. जबकि 1 हजार मरीज चिकित्सीय देख रेख में है. जिन्हें मुफ्त में उपचार मुहैया करायी जा रही है.
परवरिस व शताब्दी एड्स कल्याण योजना में 450 मरीज हो रहे है लाभान्वित. बिहार सरकार द्वारा एड्स पीड़ित मरीजों के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 100 अव्यस्क बच्चे परवरिश योजना से लाभविंत हो रहे है. वहीं 350 पीड़ित बिहार शताब्दी एड्स कल्याण योजना के तहत लाभाविंत हो रहे हैं. परवरिश योजना के तहत प्रति अव्यस्क एक हजार रुपये प्रतिमाह योजना के तहत 1500 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है. ज्ञात हो कि शताब्दी एड्स कल्याण योजना लगभग 1 वर्ष से बंद है. लिहाजा इस योजना के लाभ से अभी मरीज वंचित है.
एनजीओ से भी मरीजों को मिलता लाभ. एआरटी केंद्र से संबंध एनजीओ मिथिला विहान संस्था द्वारा सभी एचआइवी मरीजों को भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा एवं चिकित्सीय सहायता के लिए समय समय पर कुछ राशि उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा श्रम कल्याण विभाग द्वारा शिल्पकार कामगार योजना के तहत एड्स पीड़ित मरीजों को स्वरोजगार के लिए 30 हजार रुपये दिया जाता है. जिसके अंतर्गत जिले के लगभग एक दर्जन पीड़ित मरीज लाभान्वित हुए हैं.
जिले में तीन हजार एड्स मरीजों को दी जाती है दवा
पांच साल में 4500 मरीज पंजीकृत, 350 की हो चुकी है मौत
योजनाओं के लाभ से दूर होगा भेदभाव
सरकार द्वारा पंचायतों में चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ एड्स पीड़ित मरीजों दिया जाना चाहिए. जिससे मरीजों को भेद भाव से छुटकारा मिलेगा. वहीं वह समाज के मुख्यधारा में जुटकर अपनी जिंदगी को अच्छे से गुजार सकेगा.
अभिषेक त्रिवेदी, जिला समन्वयक सह डाटा प्रबंधक एआरटी केंद्र