शबनम मामले की होगी सीबीआइ जांच!
मधुबनी : नगर थाना क्षेत्र के स्टेडियम रोड निवासी नूर आलम की पुत्री शबनम के गुमशुदगी के मामले में नया मोड़ आ गया है. इस मामले की अब सीबीआइ से जांच किये जाने की संभावना बन गयी है. इससे पूर्व 11 नवंबर को अपहृता शबनम आरा को लापता करने के दोषी नामजद आरोपित मो. नसीम […]
मधुबनी : नगर थाना क्षेत्र के स्टेडियम रोड निवासी नूर आलम की पुत्री शबनम के गुमशुदगी के मामले में नया मोड़ आ गया है. इस मामले की अब सीबीआइ से जांच किये जाने की संभावना बन गयी है. इससे पूर्व 11 नवंबर को अपहृता शबनम आरा को लापता करने के दोषी नामजद आरोपित मो. नसीम के अग्रिम जमानत अर्जी को पटना हाइकोर्ट के न्यायाधीश राकेश कुमार ने खारिज करते हुए अपहृता के संबंध में आवेदक नसीम द्वारा दिये गये कथन को झूठा बताया है.
साथ ही इस मामले में नगर थाना के अनुसंधानक द्वारा मामले में किसी भी तरह की जानकारी इकट्ठा नहीं किये जाने के मामले को गंभीरता से लिया है. न्यायाधीश ने उक्त कांड की गहन जांच के लिए सीबीआइ से मामले की जांच की मंशा जाहिर की है. इस संबंध में हाइकोर्ट के न्यायाधीश ने 21 नवंबर को सीबीआई के अधिवक्ता बीपीन कुमार सिंहा को न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.
क्या है मामला. भौआड़ा निवासी स्व. नूर आलम की पुत्री शबनम आरा की शादी वर्ष 2006 में झंझारपुर निवासी मो. सैयूम के पुत्र फिरोज अहमद के साथ हुई थी. शादी के बाद से शबनम के ससुराल पक्ष के द्वारा दहेज को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा. वर्ष 2007 में वह अपने मायके भौआड़ा चली आई. पुन: उसी वर्ष शबनम के देवर फैयाज व ननदोसी नसीम शबनम को उसके पति फिरोज अहमद के पास विदेश ले जाने के नाम पर ले गये. इसके बाद से शबनम का मायके वालों के साथ कोई संपर्क नहीं हो पाया. शबनम के पिता नूर आलम व उसका भाई एम आलम द्वारा खोजबीन किये जाने पर शबनम के ससुराल पक्ष के लोग शबनम के विदेश नीदरलैंड में होने की बात कर कर टाल देते थे.
हाइकोर्ट ने आज सीबीआइ के अधिवक्ता को किया तलब
सीबीआइ को जांच सौंपने को लेकर निर्णय आज
आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
2014 में दर्ज हुआ मामला
शबनम के गुमशुदगी को लेकर वर्ष 2014 में उसके भाई एम आलम ने नगर थाना में शबनम के पति, ससुर, सास, देवर व ननदोसी पर उसे गुम करने का प्राथमिकी दर्ज कराया. इस संबंध में नगर थाना में 431/14 मामला दर्ज हुआ. पर दो वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस शबनम का ना तो पता लगा पाई व ना ही इस मामले के आरोपियों को गिरफ्तार ही कर पाई . मामले में आरोपित सभी आरोपिओं पर वरीय पुलिस पदाधिकारियों द्वारा आरोप सत्य पाया गया. इस मामले में अपराध अनुसंधान विभाग पटना के कमजोर वर्ग के एसपी ने भी संज्ञान लिया व जिले के एसपी को कार्रवाई का निर्देश देते हुए मामले के अनुसंधानक पुलिस अधिकारी को भी बदलने का आदेश दिया.