मधुबनीः विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक सौराठ सभा गाछी आज अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रही है़ जिस सभा गाछी में कभी लाखों की भीड़ जमा होती थी, आज उस जगह को इस कदर अतिक्रमण कर लिया गया है कि यदि हजार लोग भी एकत्रित हो जाये तो लोगों को जगह नहीं मिलेगी.
सरकारी उदासीनता एवं लोगों की गलत मंशा ने आज सौराठ सभा गाछी की परिभाषा ही बदल दी है़ यदि हालात यही रही तो आने वाले कुछेक वर्षो में इस सभा गाछी का नाम तो शायद ढूंढ़ने से मिल भी जाये लेकिन यह स्थल कहां था यह लोगों को नहीं मिलेगा.
सभापति का आदेश भी बेअसर
इसे जिला प्रशासन, अंचल प्रशासन की लापरवाही, स्थानीय लोगों की उदासीनता कहें या फिर अतिक्रमणकारियों की ऊंची पहुंच सौराठ सभा गाछी के अतिक्रमण को रोकने के दिशा में सभापति का आदेश भी बेअसर हो चुका है़ प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 मार्च 2013 को शून्यकाल के दौरान विधान परिषद में विधान पार्षद विनोद चौधरी ने सौराठ सभा गाछी के अतिक्रमण का मामला उठाया था़ जिस पर बहस के बाद तत्कालीन सभापति पं़ ताराकांत झा ने सरकार को इस ऐतिहासिक स्थल से तत्काल अतिक्रमण हटाने के लिये आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया था़ इस निर्देश के बाद लोगों में सौराठ सभा गाछी के अतिक्रमण मुक्त होने की आस बंधी़ लेकिन स्थानीय जिला प्रशासन एवं अंचल प्रशासन ने इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की है.
अस्तित्व पर संकट
अतिक्रमण इस कदर हो रहा है कि सौराठ सभा गाछी के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है़ प्राप्त जानकारी के अनुसार सौराठ सभा गाछी का रकवा कुल 22 एकड़ है जिसमें से करीब दो बीघा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग एवं जिला परिषद को दिया गया है़ बांकी बचे करीब 20 एकड़ जमीन अभी भी सौराठ सभा गाछी का है़ लेकिन वर्तमान में इस सभा गाछी का जिस कदर अतिक्रमण हो रहा है.
उससे यह विशाल भूखंड महज कुछ एकड़ में सिमट कर रह गया है़ स्थिति का आंकलन इसी बात से किया जा सकता है कि सौराठ सभा गाछी स्थित महादेव मंदिर के बगल में दुकान खोला जा चुका है़ सभा गाछी के बीचों बीच कभी कंक्रीट का ढेर रहता है तो कभी बालू का़ स्थानीय लोगों द्वारा निश्चय ही कई बार अतिक्रमण रोकने का प्रयास किया गया पर झंझट एवं कानूनी दावं पेच एवं अतिक्रमणकारियों को समर्थन देने वालों की संख्या अधिक रहने के कारण इन लोगों की आवाज दब कर रह गयी़ सौराठ सभा समिति के सचिव शेखर चंद्र मिश्र ने बताया है कि इस अतिक्रमण को लेकर कई बार जिला पदाधिकारी के जनता दरबार एवं अंचल अधिकारी के कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी अब तक कोई पहल नहीं हुई है जिससे अब लोगों का मनोबल टूटता जा रहा है.
वहीं दिलीप नंद ने कहा कि यदि जिला प्रशासन का रुख सकारात्मक होगा तभी इस ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व बच सकेगा़.इसी प्रकार मनोज झा,कृष्णा नंद ने कहा कि एक ओर सरकार सौराठ में मिथिला आर्ट इंस्टीट्यूट खोल कर मिथिलांचल के लोगों को अमूल्य सौगात दी है. वहीं एक विश्व प्रसिद्ध धरोहर की ओर से लापरवाह है़ मो. कलाम, अखिल कुमार ने कहा कि सरकार, जिला प्रशासन के साथ साथ स्थानीय लोगों को भी आगे आना होगा तभी अतिक्रमण हटाया जा सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत रहिका अंचल अधिकारी ने बताया कि सौराठ सभा गाछी दरभंगा महाराज की निजी संपत्ति है़ . जब तक न्यायालय का आदेश नहीं होगा तब तक निजी जमीन पर अतिक्रमण को खाली कराने के लिये प्रशासनिक पहल नहीं हो सकती है.
