मधुबनीः जिले में मनरेगा योजना की हालत काफी दयनीय है़ पंचायत स्तरीय जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियोंकी लापरवाही की वजह से मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं में सफलता काफी निराशाजनक है. सरकार द्वारा भेजी गयी राशि के बाद भी काम नहीं पूरा किया गया है जिस कारण एक ओर जहां राज्य स्तर पर जिला की किरकिरी हो रही है वहीं लोगों को उनके पंचायत में ही रोजगार के अवसर देने के इस योजना का मूल उद्देश्य ही समाप्त होता जा रहा है़.
स्थिति का आंकलन इसी बात से किया जा सकती है कि वर्ष 13-14 में जिला में मनरेगा योजना के तहत कुल 10644 योजना संचालित की गयी जिसमें से मात्र 15 फीसदी योजना ही पूर्ण हो सकी है़. पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता एवं पदाधिकारियों की लापरवाही ने सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी है़.
छह फरवरी को केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक होनी है जिसमें राज्य स्तर पर हुई उपलब्धि के आधार पर सरकार को राशि निर्गत किये जाने की रणनीति बनेगी़ ऐसी स्थिति में जिले के इस निराशाजनक उपलब्धि ने ग्रामीण विकास विभाग के सामने विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है.
कई प्रखंडों की उपलब्धि शून्य
मनरेगा में योजना को पूर्ण करने के मामले में कई प्रखंड शून्य पर है. चालू वित्तीय वर्ष में अंधराठाढ़ी,लदनियां, राजनगर, झंझारपुर, हरलाखी सहित कई प्रखंड में पूर्ण योजना की संख्या शून्य है. मनरेगा योजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी विभाग ने दे दी है़
ग्रामीण विकास विभाग के विशेष कार्यपालक पदाधिकारी अतुल प्रसाद वर्मा ने विगत शुक्रवार को मनरेगा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में लापरवाह पदाधिकारियों को हटाये जाने तक की चेतावनी दे दी है़. श्री वर्मा ने जिले में मनरेगा योजना की प्रगति पर खेद व्यक्त की एवं पदाधिकारियों को इसमें सुधार लाने की हिदायत दी. मनरेगा योजना में लापरवाही बरतने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है़. मानव दिवस सृजन करने में पीछे रहने वाले कई मुखिया जल्द ही पदच्युत हो सकते हैं. जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने पंचायती राज विभाग को इन लापरवाह मुखिया को पदच्युत करने की अनुसंशा कर दी है. विभागीय सूत्रों के अनुसार जल्द ही विभाग से इन मुखिया को पदच्युत करने का आदेश प्राप्त हो जायेगा.
