तीन साल में 1.34 लाख महिलाओं का हुआ प्रसव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Aug 2016 5:53 AM

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सरकारी अस्पतालों में बढ़ी प्रसव के मरीजों की संख्या ग्रामीण क्षेत्र में प्रसव होने पर 1400 व शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये दिये जाने का प्रावधान मधुबनी :भले ही शहर से जिला के विभिन्न हिस्सों में निजी चिकित्सालय खोले जाने की भरमार हो, पर आज भी प्रसव के लिये सरकारी अस्पतालों में काफी संख्या में […]

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सरकारी अस्पतालों में बढ़ी प्रसव के मरीजों की संख्या

ग्रामीण क्षेत्र में प्रसव होने पर 1400 व शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये दिये जाने का प्रावधान
मधुबनी :भले ही शहर से जिला के विभिन्न हिस्सों में निजी चिकित्सालय खोले जाने की भरमार हो, पर आज भी प्रसव के लिये सरकारी अस्पतालों में काफी संख्या में महिलाएं आ रही है. पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन साल में एक लाख 34 हजार 716 प्रसव हुए है. इसमें सदर अस्पताल में ही करीब 17 हजार महिलाओं का प्रसव कराया गया.
सरकारी अस्पतालों में प्रसव को आने वाली की संख्या में इस कदर बढ़ोतरी होने का सबसे बड़ा कारण आशा माना जा रहा है. अस्पताल सूत्रों का कहना है कि जितने भी प्रसव हो रहे हैं, उसमें से 90 फीसदी प्रसव के लिये आशाओं के द्वारा महिलाओं को अस्पताल लाया जाता है. इन महिलाओं को प्रोत्साहित करने के सरकार के द्वारा प्रोत्साहन राशि भी दी गयी. तीन साल में प्रोत्साहन राशि का आंकड़ा 18 करोड़ से अधिक है.
एक ओर जहां तीन साल में 1 लाख 34 हजार 716 प्रसव हुए, वहीं जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत इन माताओं को करीब 18 करोड़ रुपये योजना से दिये गये. अस्पताल सू्त्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2006 में सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से जननी बाल सुरक्षा योजना की शुरुआत की गयी. इस योजना के तहत बच्चा के जन्म पर माताओं को प्रोत्साहन राशि दी जाने लगी.
इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में प्रसव होने पर 1400 एवं शहरी क्षेत्र में 1000 रूपये दिये जाने का प्रावधान किया गया.
24 घंटा खुली रहती है प्रसव कक्ष: प्रसव की संख्या में सालाना बढ़ोतरी हो रही है. इसको देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने भी बेहतर व्यवस्था किया है. 24 घंटे प्रसव कक्ष खुली रहती है. हर शिफ्ट में एक महिला चिकित्सक , ए ग्रेड नर्स, आशा शामिल रहती है. प्रसव के बाद बेड पर ही अब माताओं को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करा दी जाती है.
कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिये रेंडियेंट वार्मर की भी व्यवस्था की गयी है
आशा की पहल: सीएस डाॅ अमरनाथ झा ने बताया है कि बेहतर व्यवस्था है, आशा के सार्थक पहल पर प्रसव को आने वाले महिलाओं की संख्या बढ़ रही है.
जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत दिये गये करीब 18 करोड़ प्रोत्साहन राशि
सदर अस्पताल में तीन साल में हुए प्रसव का आंकड़ा
2013-14 : 6008
2014-15 : 5038
2015- 16 : 5745
सालाना प्रसव का आंकड़ा इस प्रकार है
साल प्रसव की संख्या
2013-14 : 45903
2014-15 : 43364
2015-16 : 45449
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