मधुबनीः नेपाल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवा चरमरा गयी है. चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का इलाज बंद है. इस कारण विभिन्न इलाकों में पिछले दो दिनों में 11 लोगों के मरने की सूचना है. हालांकि हड़ताल और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फिलहाल कोई नेपाली उच्चधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं. इधर, निजी चिकित्सासंस्थानों के हड़ताल का समर्थन किये जाने के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं. सीमावर्ती जनकपुर अंचल में सभी चिकित्सा संस्थान व अस्पताल में उपचार बंद है. किसी भी प्रकार के आकस्मिक व अन्य सेवा संचालित नहीं हैं.
ऐसे में सीमावर्ती जनकपुर, धनुषा, महोतरी, सर्लाही, उदयपुर आदि जिले के रोगी भारतीय अस्पतालों का रुख करने लगे हैं. जनकपुर जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ बीके प्रसाद ने बताया कि जनकपुर के सरकारी व निजी अस्पतालों में करीब 4 हजार से अधिक मरीज इलाज करवाने आते हैं.स्थ्य सेवा ठप होने के बाद लोगों को मधुबनी, दरभंगा का ही सहारा है. नेपाल के मलुआहा गांव से सदर अस्पताल मधुबनी में रवींद्र महतो ने बताया कि उनकी पत्नी सीढ़ी से गिर गयी. इस कारण कुल्हा टूट गया. पर वहां इलाज नहीं हो सका. इधर, हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी इलाके में दिख रहा है. खोबंद, पर्सा जिले में इलाज के अभाव में छह लोगों के मरने की खबर है. इसमें 2 महिलाएं व एक बच्चा शामिल है.
जबकि सिरहा में एक, धनुषा में 2 तथा उदयपुर में दो लोगों की मौत हुई है. उदयपुर के विकास अधिकारी समरेंद्र उपाध्याय ने इसकी पुष्टि की है. वहीं नेपाल डॉक्टर्स फेडरेशन के अधिकारियों ने बताया कि हड़ताल के कारण आपात सेवा बंद होने के कारण प्रभाव पड़ा है. इधर, भरतपुर अस्पताल में रोगियों के परिजनों ने आम लोगों के साथ हंगामा किया. ये लोग हड़ताल का विरोध कर स्वास्थ्य सेवा बहाल करने की मांग कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल परिसर स्थित प्रशासनिक कक्ष का घंटों घेराव किया.
अनशन पर बैठे डॉ गोविंद केसी की हालत बिगड़ी
त्रिभुवन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का अनशन जारी है. अनशन पर बैठे चिकित्सक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ गोविंद केसी की हालत बिगड़ने लगी है. चितवन में भी डॉक्टरों की भूख हड़ताल शुरू हो गयी है. इधर, चिकित्सक संघ ने नेपाल सुप्रीम कोर्ट के स्वास्थ्य सेवा सुचारु करने संबंधित आदेश पर सवाल उठाया है. संघ ने इसे गैर पारदर्शी बताया है. संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ कृष्ण पौडेल ने बताया कि डॉक्टरों की मांगों को अनसुना करना ठीक नहीं है.
