90 लाख से खरीद की गयी कचरा पेटी का उपयोग नहीं

उदासीनता. कहीं नाले में, तो कहीं सड़क पर ही गिर कर बनी कचरा दो माह पहले ही पांच सौ पेटी की हुयी थी खरीद मधुबनी : शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने का सपना सपना ही रह जायेगा. जहां पूरे देश में स्वच्छता को लेकर अभियान चलाया जा रहा है. वहीं मधुबनी शहर कचड़े का […]

उदासीनता. कहीं नाले में, तो कहीं सड़क पर ही गिर कर बनी कचरा

दो माह पहले ही पांच सौ पेटी की हुयी थी खरीद
मधुबनी : शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने का सपना सपना ही रह जायेगा. जहां पूरे देश में स्वच्छता को लेकर अभियान चलाया जा रहा है. वहीं मधुबनी शहर कचड़े का शहर बनता जा रहा है. आलम यह है कि शहर के हरेक चौक चौराहा पर कचरा का अंबार लगा है. लेकिन, नगर परिषद द्वारा सफाई समस्या को सुलझाने में विफल हो रहा है. लापरवाही यह कि जिस कचरा पेटी की खरीद प्रशासन ने करीब दो माह पहले किया था उसका आज रख रखाव भी नहीं हो रहा. जो हालात हैं
उससे यही बातें कही जा सकती है कि कचरा पेटी के नाम पर महज राशि का निकासी ही किया गया. कहीं कचरा पेटी गंदे नालें में फेंका है तो कहीं सड़क किनारे पेटी लुढका पड़ा दिख रहा है. कहीं कइ दिनो तक कचरा पेटी से कचरे का उठाव नहीं हो पाने के कारण अब बीच सड़क पर ही कचरा फेंकने को लोग मजबूर हैं.
पचास कर्मी व एनजीओ पर है सफाई का जिम्मा : नगर को स्वच्छ और साफ रखने के लिए नगर परिषद द्वारा पचास स्थायी सफाई कर्मी व एनजीओ को लगाया गया है. लेकिन शहर की हालत बदतर है. कचरा से मुहल्ला परेशान है. सफाई कर्मी के रहते हुए भी शहर से कचरा जाने का नाम नहीं ले रहा. शहर के सफाई पर सात लाख रूपये प्रतिमाह खर्च किया जा रहा है. लेकिन, शहर की हालत बदतर है.
500 कचरा पेटी की हुई थी खरीदारी
शहर में कचरा रखने के लिए करीब दो महिना पहले पांच सौ कचरा पेटी की खरीद की गयी थी. जिसे नीयत स्थान पर रखकर कचरे से शहर बचाना मुख्य उद्देश्य था. लेकिन, कचरा पेटी खुद कचरा बन कर शहर को सुंदर बनाने की अभियान को विफल कर चुकी है.
गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल
शहर में स्वच्छ सुंदर बनाने के उद्देश्य से जो कचरा पेटी खरीदी गयी थी, उसके गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे है. जानकारी के अनुसार नप प्रशासन के द्वारा करीब 92 लाख पचास हजार रुपये से 500 कचरा पेटी की खरीदगी हुई थी. लेकिन, कचरा पेटी के गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए है. एक भी कचरा पेटी का उपयोग सही से नहीं हो रहा है. सफाई कर्मी के शिथिलिता के कारण कचरा पेटी स्वयं कचरा बन कर रह गयी है. जिससे शहर में हरेक चौक चौराहा पर कचरा के साथ-साथ कचरा पेटी भी फेंका जैसा लगता है.

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