मधुबनी : छठ पर्व को सदियों से आस्था का महान पर्व कहा जाता रहा है. लोगों में यह आस्था है कि यदि छठ मइया से श्रद्धा से जो कुछ भी मांगा जाता है तो मां उसे पूरा करती है. और जब लोगो की मांगी दुआ मां पूरा कर देती है तो यह आस्था और अटूट हो जाता है. तभी तो हजारों कोस दूर बैठे लोग हर काम छोड़ इस पर्व में शामिल होने गांव चले आते हैं.
पंडौल प्रखंड के सागरपुर की ममता मिश्रा ने सात साल पहले छठ घाट पर मां से कुछ मांगा था. मन्नत पूरा हो गया तो इस साल उस मन्नत को पूरा करने के लिये महिला उद्योगपति ममता दक्षिण अफ्रिका में काम करने वाले अपने पति विजय के साथ मायके आ पहुंची है. आस्था व श्रद्धा के साथ अपनी मां के साथ नहाय खाय का रश्म पूरा किया तो पर्व की तैयारी में पति के साथ जुटी है. ममता बताती है कि सात साल पहले उन्होंने छठ घाट पर ही पूजा के दौरान मां से कुछ मन्नत मांगी थी.
मन्नत पूरा होने पर खुद ही पर्व करने की बात थी. बतौर ममता मन्नत पूरा हो गया है तो इस साल पहली बार खुद छठ करने आयी है. यूं तो ममता हर साल कहीं रहें, छठ में मायके जरूर ही आती है. पर कभी खुद पर्व नहीं किया था. पर इस साल वह खुद भी पर्व कर रही है. मंगलवार को वह नहाय खाय की. पति के साथ पूजा में काम आने वाले गेहूं को धो कर आस्था के साथ सुखाने में व्यस्त रही.
बचपन से है छठ के प्रति श्रद्धा. फैशन डिजाइनिंग की कोर्स करने के बाद आज नोयडा में ममता का अपना उद्योग है. 150 परिवारों का चूल्हा इनके इस कंपनी से चलता है. ममता बताती है कि वह बचपन से ही छठ पूजा को देखती और इसकी महिमा को जानती आ रही है. खुद कई बार उन्होंने इस पूजा में मांगे गये मन्नत को पूरा होते देखा है. बताती है कि उसकी पढाई लखीसराय से हुई. बाद में वह फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के लिये दिल्ली जाने की योजना बनायी. परिवार में इस बात का प्रस्ताव दिया तो शुरुआत में तो इनके पिता ने विरोध किया.
इसी दौरान छठ पर्व आया तो इनकी मां ने छठ पूजा में मन्नत मांगा. बताती है कि न जाने फिर पिता जी पर क्या असर हुआ कि वे ममता को दिल्ली में जाकर पढाइ करने को राजी हो गये. इसके बाद उन्होंने दिल्ली से पढाई पूरा किया. बताती है कि करीब सात साल पहले उन्होंने खुद भी एक मन्नत मांगा था. बताती है कि मन्नत पूरा हो गया है तो इस साल से छठ पर्व करने आ गयी है.
पर्व के प्रति आस्था में
पति ने निभाया साथ
ममता के पर्व के प्रति आस्था में इनके पति विजय सिंह ने भी पूरा साथ निभाया है. ममता बताती है कि उनके पति दक्षिण अफ्रिका में काम करते हैं. इस साल जब उन्होंने अपने पति को पर्व करने की बात बताया तो विजय भी खुश हुए और इनके साथ पर्व में शरीक होने दक्षिण अफ्रिका से गांव चले आये.
हर साल करूंगी पूजा
ममता बताती है कि मन्नत तो मात्र एक साल तक ही पानी में खड़ा होने का था. पर मन में इस पूजा को लेकर इतनी अधिक उत्साह व श्रद्धा बन गयी है कि अब तो हर साल वह खुद पूजा करेंगी. बताती है कि यदि मां पर लोग अपनी आस्था को छोड़ दें तो छठ मइया उसे पूरा कर ही देती है. पहली बार पूजा से वह बहुत ही खुश है.
