उदासीनता. जल संसाधन विभाग ने नहीं करायी उड़ाही
मधुबनी : विगत नौ सालों में कोसी व इससे जुड़ी किसी भी शाखा नदियों की उड़ाही नहीं हुई है. इस कारण नदियोंें लगातार गाद जमा हो रही है. इलाके से गुजरने वाली कोसी नदी की मुख्य शाखा सहित अन्य छोटी- छोटी शाखाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. यदि मूसलधार बारिश होती है, तो बीते दिनों आयी बाढ़ से भयानक तबाही मच सकती है. इस साल आयी बाढ़ में विभिन्न नदियों में करीब दो से तीन फुट तक सेल्टेशन हो गया है. इसके बाद से कई जगहों पर नदियों का तटबंध भी टूट गया है. जिससे खेत व नदी की सतह एक समान हो गयी है. मुख्य कोसी कैनाल की हालत तो और भी खराब है. इसके अलावे अन्य नदियों की हालत भी इसी प्रकार है. कोसी, कमला, भूतही बलान नदी में भी दो से तीन फुट तक सेल्टेशन हो जाने के कारण जल अधिग्रहण क्षमता कम हो गयी है.
करीब एक लाख 86 हजार फुट लंबी मुख्य नदी में एक ओर जहां दिन व दिन सेल्टेशन के कारण गहराई कम होती जा रही है. वहीं, कोसी में बना प्लास्टर भी अब कई जगह से पूरी तरह टूट गया है. जिससे तटबंध भी कमजोर हो रहा है. इससे नदी में पानी ग्रहण की क्षमता भी कम होते जा रही है. विगत करीब नौ सालों में कोसी के मुख्य नदी में करीब सात से दस फुट तक बालू व गंदगी जमा (सेल्टेशन) हो गया है. जिससे पानी ग्रहण की क्षमता कम हो गयी है. पानी जमा नहीं हो पा रहा है. इससे किसानों का हित प्रभावित हो रहा है. यह किसानों के हित के लिए बनाया गया था. सेल्टेशन होने के कारण कोसी मुख्य कैनाल की गहराई कम होती जा रही है.
निर्माण के समय में कोसी की गहराई जहां 17 से 20 फुट तक था, आज उसकी गहराई कम होकर 11 से 12 फुट गयी है. ऐसे में, पानी के ग्रहण की क्षमता कम होना स्वाभाविक है.
पानी का सही से नहीं हो रहा उपयोग : कोसी कैनाल में किसानों के सिंचाई के लिए उपयुक्त समय पर पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. जब कभी नेपाल से पानी छोड़ा जाता है, तो खेती के लिए उसका सही उपयोग नहीं हो पाता है. मुख्य शाखा से जुड़ी शाखा नदी के निर्माण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है. कई जगह तटबंध कटाव हो गया है. जिस कारण पानी छोड़े जाने पर सही से उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. जहां पानी की आवश्यकता होती है वहां पानी पहुंच ही नहीं पाता. जहां पर आवश्यकता नहीं होती है, वहां पर तबाही मचा देती है. मुख्य कैनाल में कई जगहों पर बनाये गये फाटक हमेशा खुला ही रहता है. जिससे अन्य छोटी शाखा की बात, तो दूर मुख्य कैनाल से सटे क्षेत्रों के किसानों के खेत में भी पानी नहीं पहुंच पाता है.
जल्द होगी टेंडर की प्रक्रिया : एसडीओ शिवदानी पासवान ने बताया है कि बताया है कि यह बात सही है को कोसी का करीब दस साल में सात से आठ फुट तक गहराई सेल्टेशन के कारण कम हो गयी है. जिस कारण कोसी के जल ग्रहण की क्षमता भी कम हो रही है. सफाई के लिए जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया की जायेगी. इसके लिए पहल की जा रही है. वहीं, तटबंध के मरम्मत का काम भी किया जा रहा है.
2008 में हुई थी उड़ाही
कोसी मुख्य कैनाल का उड़ाही विगत नौ सालों से नहीं की गयी है. परिणाम यह है कि अब कोसी की गहराई करीब पांच से आठ फुट तक कम हो गयी है. खुटौना पश्चिमी कोसी नहर परियोजना विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में कोसी कैनाल की उड़ाही की गयी थी. जिसके बाद से अब तक इसकी उड़ाही नहीं की गयी. इन सालों में नेपाल से आने वाले जल के साथ- साथ भारी मात्रा में बालू आने के कारण नदी में दिन व दिन सेल्टेशन होता गया.
1.86 लाख फुट लंबा है मुख्य कैनाल
पश्चिम कोसी नहर परियोजना से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में मुख्य कैनाल की लंबाई एक लाख 86 हजार फुट है. इसमें खुटौना से 86 आरडी की लंबाई 86 हजार फुट है. खुटौना से राजनगर 30 आरडी की लंबाई 30 हजार फुट, खजौली से 45 आरडी की लंबाई 45 हजार फुट एवं केवटी से 26 आरडी की लंबाई 26 हजार फुट है.
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