कोर्ट के आदेश की अनदेखी लापरवाही. सिविल कोर्ट में जरूरत के अनुसार नहीं हैं जवान
मधुबनी : व्यवहार न्यायालय में सुरक्षा को लेकर किया गया इंतजाम बेपटरी हो गया है. कहीं किसी को रोका नहीं जाता. कहीं जांच नहीं की जाती. जिसकी मर्जी जो जहां आये जहां जाये. सुरक्षा में लगाया गया गार्ड भी इधर उधर ही घूमते रहते हैं. विगत कुछ महीनों में व्यवहार न्यायालयों में घटना को लेकर […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
मधुबनी : व्यवहार न्यायालय में सुरक्षा को लेकर किया गया इंतजाम बेपटरी हो गया है. कहीं किसी को रोका नहीं जाता. कहीं जांच नहीं की जाती. जिसकी मर्जी जो जहां आये जहां जाये. सुरक्षा में लगाया गया गार्ड भी इधर उधर ही घूमते रहते हैं.
विगत कुछ महीनों में व्यवहार न्यायालयों में घटना को लेकर सभी न्यायालयों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का आदेश दिया गया. इसी बाबत व्यवहार न्यायालय मधुबनी में भी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन कुछ अब व्यवहार न्यायालय के सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है. फिर से लोगों की आवाजाही बिना रोक टोक जारी है.
12 जवान भरोसे न्यायालय सुरक्षा
व्यवहार न्यायालय के प्रवेश के लिए आठ द्वार को चिह्नित कर प्रत्येक द्वार पर दो- दो सिपाही का प्रावधान था. लेकिन फिलहाल मात्र सात सिपाही और तीन जमादार के भरोसे ही न्यायालय की सुरक्षा है. जो परिसर में घूम- घूम कर सुरक्षा में रहते है.
नहीं है मेटल डिटेक्टर . न्यायालय परिसर को सुरक्षा को चुस्त दुरुस्त के लिए आठ जगह पर तैनात सिपाही को मेटल डिटेक्टर मिला था. लेकिन फिलहाल सुरक्षा का यह आलम है कि न तो सिपाही रहा और न ही किसी के पास मेटल डिटेक्टर है. मात्र न्यायालय परिसर के एक द्वार पर तैनात सिपाही को मेटल डिटेक्टर है. अन्य सिपाही से जिला प्रशासन द्वारा मेंटल डिटेक्टर जमा करा लिया गया है.
न सीसीटीवी न पास की व्यवस्था
न्यायालय के आदेश का न्यायालय परिसर में ही पालन नहीं किया जाता है. सरकार व उच्च न्यायालय ने न्यायालयों में घटना को देखते हुए न्यायालय परिसर में पुख्ता सुरक्षा के साथ साथ सीसीटीवी लगाने का आदेश के साथ – साथ न्यायालय में प्रवेश के लिए पास की व्यवस्था करने का आदेश था. लेकिन प्रशासन द्वारा न तो सीसीटीवी और नहीं पास निर्गत करने की व्यवस्था कर पाया.
16 न्यायाधीशों के साथ सैकड़ों कर्मी रहते हैं मौजूद
कोर्ट में वर्तमान में जिला सत्र न्यायाधीश, एडीजे, त्वरित न्यायालय, मजिस्ट्रेट सहित सैकड़ों न्यायालय कर्मी न्यायालय में मौजूद रहते है. वहीं इसके साथ 450 अधिवक्ता 200 से अधिक अधिवक्ता लिपिक व जिले भर से अपने मुकदमा के पक्षकार रहते है, लेकिन इन सबके लिए माकूल सुरक्षा का इंतजाम नहीं है.
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