कलाग्राम का दर्जा देना ही काफी नहीं, मिले मूलभूत सुविधा भी

जितवारपुर गांव को विकसित करने के लिए चुनौती अब भी बरकरार मधुबनी : वस्त्र मंत्रालय द्वारा दो माह पूर्व ही मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाला जितवारपुर गांव को कलाग्राम घोषित किया गया. पर अब तक इस दिशा में किसी प्रकार की आगामी पहल नहीं की गयी है. जिससे एक बार फिर […]

जितवारपुर गांव को विकसित करने के लिए चुनौती अब भी बरकरार
मधुबनी : वस्त्र मंत्रालय द्वारा दो माह पूर्व ही मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाला जितवारपुर गांव को कलाग्राम घोषित किया गया. पर अब तक इस दिशा में किसी प्रकार की आगामी पहल नहीं की गयी है. जिससे एक बार फिर इस गांव के लोगों में निराशा व्याप्त होते जा रहा है.
लोगों में यह आशंका बैठती जा रही है कि पूर्व में जिस प्रकार से इस गांव में मिथिला पेंटिंग का म्यूजियम खोलने की बात सीएम के द्वारा कर दिये जाने के बाद से अब तक उसे सही से धरातल पर नहीं उतारा जा सका है. क्या इसी प्रकार इस बार भी तो सरकार इस गांव को कलाग्राम का दर्जा देने की घोषणा कर महज अपनी औपचारिकता तो नहीं निभा लिया है.
जितवारपुर गांव के भास्कर कुलकर्णी संस्था के सदस्य विश्वंभर झा, देवेंद्र झा, कृष्ण कांत झा ने बताया कि शिल्प गांव घोषित होने के बाद कलाकारों को अपने द्वारा बनाएं गए कलाकृति को बेचने के लिए सरकारी दुकान खुलना चाहिए. लेकिन, अभी तक एक भी सरकारी पदाधिकारी इस गांव को देखने नहीं आया.
गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है.
कोई सार्वजनिक लाइब्रेरी नहीं है.
इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए.
विश्व भर में है विख्यात : जितवारपुर गांव अपनी कलाकृति को लेकर जिला ही नहीं पूरे विश्व में प्रख्यात है. इस गांव के एक हजार से ज्यादा व्यक्ति इस कला से जुड़े हुए है. इतना ही नहीं इस गांव के एक दर्जन से ज्यादा कलाकारों को राज्य पुरस्कार से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के पुरस्कार मिल चुका है.
स्व. सीता देवी, जगदंबा देवी को बिहार ही नहीं अन्य राज्य सरकार द्वारा भी पुरस्कार मिल चुका है. लेकिन, कला ग्राम घोषित होने के बाद जो सुविधा मिलना चाहिए. उस ओर सरकार का ध्यान अभी तक नहीं गया है. अभी गांव में आवश्यक सुविधा का घोर अभाव है. पद्मश्री बौआ देवी बताती है कि की सरकार सिर्फ घोषणा करती है. उनका कहना था कि कलाकार को जब तक सरकार सुविधा नहीं देगी तब तक कलाकारों का उत्थान नहीं हो सकता है.
गांव में अभी भी मूलभूत सुविधा का घोर अभाव है. साफ सफाई, सड़क, पर्यटक के ठहरने के लिये उचित भवन, अन्य सुविधा का अभी अभाव है. लोगों का कहना है कि जब तक इन सब समस्याओं का निदान नहीं होगा.
कलाग्राम का दर्जा मिलकर भी कुछ नहीं होगा. खासकर पर्यटक के ठहरने के लिये व कलाकारों को अपनी कला को सहेजने के लिये पूर्व में की गयी म्यूजियम की घोषणा को ठोस आधार नहीं दिया जायेगा कलाकारों के हित की बातें करना भी बेमानी ही है. कलाकार प्रभाकर झा, अमित कुमार झा, रामरूप पासवान, संतोष पासवान ने बताया कि कला ग्राम घोषित होने से यहां के कलाकारों में जितना उम्मीद जगा वह अब धीरे धीरे धूमिल हो रहा है.
कलाग्राम में सबसे पहले मुख्य द्वार पर पुरस्कार प्राप्त कलाकार के फोटो के साथ द्वार बनना चाहिए.
गांव में पूरा पक्की सड़क हो
पानी की सुविधा
बिजली की सुविधा और साफ-सफाई के लिए प्रत्येक 400 मीटर पर एक डस्टवीन होना चाहिए
टूरिस्ट के आकर्षण के लिए गांव में प्रत्येक जगह वाल पर कलाकृति होना चाहिए
टूरिस्ट को ठहरने के लिए आधुनिकतम भवन हो जिसमें सभी प्रकार का सुविधा हो
गांव में हस्तशिल्प हाट लगे इसका व्यवस्था हो
कारीगरी सीखने के लिए गांव में प्रशिक्षण केंद्र होना अनिवार्य है
युवाओं को टूरिस्ट के मनोरंजन कैसे कराया जाये इसका प्रशिक्षण मिलना चाहिए
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए.
गांव में कलाकारों के सुविधा के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ मेला का आयोजन होना चाहिए
पुराने एवार्डी कलाकारों को पेंशन का व्यवस्था होना चाहिए

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