भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन आज

सकरी/पंडौल : श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है़ इस बार 7 अगस्त 2017 सोमवार को ग्रहण के कारण दिन में 11. 05 बजे से दोपहर 01.52 बजे से पूर्व तक ही राखी बांधने का योग है़ बहनों को इस पर्व का बड़ी ही बेसब्री […]

सकरी/पंडौल : श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है़ इस बार 7 अगस्त 2017 सोमवार को ग्रहण के कारण दिन में 11. 05 बजे से दोपहर 01.52 बजे से पूर्व तक ही राखी बांधने का योग है़
बहनों को इस पर्व का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है़ जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं तो वे यह कामना करती हैं कि उसके भाई के जीवन में कभी कष्ट न हो, वह उन्नति करें और उसका जीवन सुखमय हो़ इसी तरह भाई भी इस रक्षा सूत्र को बंधवाकर गौरवान्वित अनुभव करते हैं और जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाते हैं. इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने से पहले एक विशेष थाली सजाती हैं. इस थाली में सात खास चीजें होनी चाहिए़
खास सामग्री
कुमकुम. तिलक मान सम्मान का भी प्रतीक है़ बहनें कुमकुम लगाकर भाई के प्रति सम्मान प्रकट करती है तथा भाई के लंबी उम्र की कामना करती है़ इसलिए थाली में कुमकुम विशेष रूप से रखना चाहिए़
दीपक. राखी बांधने के बाद बहन दीपक जलाकर भाई की आरती भी उतारती है़ इस संबंध में मान्यता है कि आरती उतारने से सभी प्रकार की बुरी नजरों से भाई की रक्षा हो जाती है़ आरती उतारकर बहन कामना करती है कि भाई हमेशा स्वस्थ और सुखी रहे़
चावल. चावल शुक्र ग्रह से भी संबंधित है़ शुक्र ग्रह के प्रभाव से ही जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है़ तिलक लगाने के बाद तिलक के उपर चावल भी लगाया जाता है. तिलक के ऊपर चावल लगाने का भाव यह है कि भाई के जीवन पर तिलक का शुभ असर हमेशा बना रहे तथा भाई को समस्त भौतिक सुख-सुविधायें प्राप्त हों.
नारियल. बहन अपने भाई को तिलक लगाने के बाद हाथ में नारियल देती है़ नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है़ श्री यानी देवी लक्ष्मी का फल, यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है़ बहन भाई को नारियल देकर यह कामना करती है कि भाई के जीवन में सुख और समृद्धि हमेशा बनी रहे और वह लगातार उन्नति करता रहे़ यह नारियल भाई को वर्ष पर्यन्त अपने घर में रखना चाहिए़
मिठाई. राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई को मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा करती है़ मिठाई खिलाना इस बात का प्रतीक है कि बहन और भाई के रिश्ते में कभी भी कड़वाहट न आए, मिठाई की तरह यह मिठास हमेशा बनी रहे़
रक्षा सूत्र (राखी). बहन राखी बांधकर अपने भाई से उम्र भर रक्षा करने का वचन लेती है़ भाई को भी ये रक्षा सूत्र इस बात का अहसास करवाता रहता है कि उसे हमेशा बहन की रक्षा करनी है़ रक्षा सूत्र का अर्थ है, वह सूत्र (धागा) जो हमारे शरीर की रक्षा करता है़ रक्षा सूत्र बांधने से त्रिदोष शांत होते हैं. त्रिदोष यानि वात, पित और कफ हमारे शरीर में कोई भी बीमारी इन दोषों से ही संबंधित होती है़ रक्षा सूत्र कलाई पर बांधने से शरीर में इन तीनों का संतुलन बना रहता है़ यह धागा बांधने से कलाई की नसों पर दबाव बनता है़ जिससे ये तीनों दोष नियंत्रित रहते हैं.
गंगाजल से भरा कलश. राखी की थाली में गंगा जल से भरा हुआ एक कलश भी रखा जाता है़ इसी जल को कुमकुम में मिलाकर तिलक लगाया जाता है़ ऐसी मान्यता है इसी कलश में सभी पवित्र तीर्थो और देवी-देवताओं का वास होता है़ इस कलश के प्रभाव से भाई और बहन के जीवन में सुख और स्नेह सदैव बना रहता है़

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