मधेपुरा: 20 दिनों में 20 रुपये महंगी हुई चीनी, गृहिणियों का बिगड़ा बजट; त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

मधेपुरा में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत में पिछले 20 दिनों में 20 रुपये प्रति किलो का भारी उछाल आया है. 45 रुपये वाली चीनी अब 66 रुपये किलो बिक रही है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों और गृहिणियों का बजट बिगड़ गया है. त्योहारों से पहले इस महंगाई ने आमजन की चिंता बढ़ा दी है.

मधेपुरा शहर के खुदरा बाजार में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत में अचानक भारी उछाल आया है. पिछले करीब 20 दिनों के भीतर चीनी के दाम में लगभग 20 रुपये प्रति किलो तक की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जो चीनी कुछ दिन पहले तक 45 रुपये किलो बिक रही थी, वह अब 66 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. इस बेतहाशा मूल्य वृद्धि ने मध्यमवर्गीय और सीमित आय वाले परिवारों, विशेषकर घर चलाने वाली गृहिणियों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है.

त्योहारों से पहले महंगाई की दोहरी मार, राशन का हिसाब हुआ मुश्किल

चीनी की कीमत बढ़ने का असर केवल सुबह-शाम की चाय तक सीमित नहीं है. घरों में बच्चों के दूध, शरबत, मिठाई, हलवा और खीर जैसे कई खाद्य पदार्थों में चीनी का नियमित उपयोग होता है. अगस्त महीने के बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों का सिलसिला तेज होने वाला है, जिसमें चीनी की मांग काफी बढ़ जाती है. महिलाओं का कहना है कि दाल, चावल, सरसों तेल और सब्जियों के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, ऐसे में अब चीनी महंगी होने से रसोई का हिसाब रखना और भी मुश्किल हो गया है.

राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है मधेपुरा का खुदरा भाव

सरकारी उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों पर गौर करें तो 17 अगस्त 2026 को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव करीब 51.68 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था. इसके विपरीत, मधेपुरा के स्थानीय बाजार में यह 60 से 66 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है. व्यापारिक बाजार विश्लेषण के अनुसार, अगस्त के मध्य (8 से 14 अगस्त) में बिहार में चीनी के मिल डिलीवरी भाव में 50 से 165 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई है. हालांकि, केंद्र सरकार ने बाजार में अनावश्यक जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है, फिर भी खुदरा बाजार में इसका असर नहीं दिख रहा है.

गृहिणियों का छलका दर्द: क्या कहती हैं शहर की महिलाएं?

लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान शहर की महिलाओं ने अपनी चिंताएं साझा की हैं:

  • सोनम प्रकाश: "पहले 45-50 रुपये में चीनी मिल जाती थी, अब 60 से अधिक कीमत सुनकर हर बार खरीदारी से पहले सोचना पड़ता है. सीमित बजट में घर चलाना मुश्किल हो रहा है, सरकार को कीमतों पर निगरानी रखनी चाहिए."
  • लक्ष्मी: "अचानक दाम बढ़ने से गृहिणियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. तेल, दाल और सब्जियों के बाद अब चीनी भी महंगी हो गई है. त्योहार सिर पर हैं और खर्च बढ़ने की चिंता सता रही है."
  • मीनू: "दूध, चाय और मेहमानों के लिए शरबत में रोज चीनी लगती है. छोटी-छोटी चीजों के दाम बढ़ते हैं तो महीने के अंत में इसका बड़ा असर दिखता है. बाजार में उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध होनी चाहिए."
  • रागिनी: "त्योहारों पर मांग बढ़ने का मतलब यह नहीं कि दुकानदार मनमाना दाम वसूलें. प्रशासन को बाजार में थोक और खुदरा कीमतों की जांच कर कालाबाजारी रोकनी चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके."

प्रशासन से हस्तक्षेप और कालाबाजारी रोकने की मांग

लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए मधेपुरा के स्थानीय उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है. आम लोगों का कहना है कि प्रशासन को खुदरा दुकानों पर नियमित रूप से कीमतों की निगरानी करनी चाहिए. इसके साथ ही, जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों पर त्वरित जांच की जाए. उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि सरकार द्वारा आपूर्ति बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का असर जल्द ही स्थानीय बाजार में दिखेगा और आगामी त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में नरमी आएगी, जिससे उन्हें राहत मिल सके.


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By Aman Kumar

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