Sawan First Somwari : सावन की पहली सोमवारी पर तड़के से ही बाबा सिंहेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं. महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में बाबा के दर्शन का इंतजार कर रहे थे. लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हुए. जैसे-जैसे श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ता गया, मंदिर परिसर में लगी बैरिकेडिंग अचानक टूटकर गिर गई. इसके बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
पट खुलने में आधे घंटे की देरी ने बढ़ाया तनाव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हर वर्ष सावन की सोमवारी पर तड़के करीब दो बजे गर्भगृह का पट खोल दिया जाता है. इस बार न्यास समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी और सचिव की अनुमति को लेकर स्पष्टता नहीं होने से मंदिर कर्मियों के बीच असमंजस बना रहा. परिणामस्वरूप गर्भगृह का पट लगभग आधे घंटे की देरी से खोला गया. इस दौरान कतार में खड़े युवाओं का धैर्य टूट गया. कुछ युवक बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और शोर-शराबा शुरू कर दिया. बढ़ते दबाव के बीच बैरिकेडिंग टूट गई.
स्वयंसेवकों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
बैरिकेडिंग गिरते ही महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में दहशत फैल गई. श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसे हालात बनने लगे. मौके पर मौजूद स्वयंसेवकों ने तत्काल मोर्चा संभाला और भीड़ को नियंत्रित करते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. उनकी सतर्कता के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और हजारों श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली.
प्रशासन और न्यास समिति की तैयारियों पर उठे सवाल
घटना के बाद श्रद्धालुओं ने प्रशासन और सिंहेश्वर न्यास समिति की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि हर वर्ष सावन में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, फिर भी भीड़ का सही आकलन, मजबूत बैरिकेडिंग और समय पर दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकी. यदि पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और बेहतर समन्वय होता तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था.
श्रद्धालुओं ने की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
स्थानीय श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अगली सोमवारी से पहले पूरे मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए. मजबूत बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती और समय पर गर्भगृह का पट खोलने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आस्था के इस महापर्व में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी या खतरे का सामना न करना पड़े.
