मधेपुरा के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान सदर अस्पताल की तस्वीर अब धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है. मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किए जा रहे सदर अस्पताल में सामान्य चिकित्सा के साथ सर्जरी की सुविधा मिलने से मरीजों को काफी राहत मिल रही है. अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल किए जाने से ऐसे मरीजों की संख्या कम होने लगी है, जिन्हें इलाज के लिए पूर्णिया, भागलपुर या पटना रेफर करना पड़ता था. अस्पताल प्रबंधन का जोर इस बात पर है कि जिस बीमारी का इलाज उपलब्ध संसाधनों से संभव है, उसका उपचार स्थानीय स्तर पर ही किया जाए.
सर्जरी की सुविधा ने मरीजों की परेशानी की कम
सदर अस्पताल में सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने का सीधा लाभ उन मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें पहले ऑपरेशन के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता था. चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता के साथ अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है.
सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन और उपचार की सुविधा मिलने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर निजी अस्पतालों का आर्थिक बोझ भी कम हो रहा है. वहीं, मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की यात्रा, रहने और खाने-पीने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिल रही है.
गंभीर मरीजों को ही जरूरत के अनुसार किया जा रहा रेफर
अस्पताल प्रबंधन की कोशिश है कि इलाज योग्य मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर रेफर नहीं किया जाए. मरीज की स्थिति और सदर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करने के बाद ही रेफर करने का निर्णय लिया जा रहा है. हालांकि गंभीर मामलों में आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था पहले की तरह जारी है.
सदर अस्पताल प्रबंधन कुमार नवनीत चंद्र के अनुसार किसी भी मरीज को रेफर करने से पहले उसकी स्थिति और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखा जा रहा है. यदि मरीज का उपचार सदर अस्पताल में संभव है तो उसे यहीं बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है. इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बचता है.
जांच और उपचार सुविधाओं के विस्तार से कम हुआ रेफरल दबाव
सदर अस्पताल में जांच, उपचार और सर्जरी जैसी सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधा मिल रही है. इसका असर रेफरल व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल होने से बाहर भेजे जाने वाले मरीजों की संख्या में कमी आने की बात सामने आ रही है.
गुणवत्तापूर्ण इलाज प्राथमिकता : डीपीएम
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम प्रिंस कुमार ने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है. हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि सदर अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार मिले. इसके लिए अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अस्पताल की सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास जारी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और उन्हें उपचार के लिए अनावश्यक रूप से बाहर नहीं जाना पड़े. इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन मिलकर काम कर रहे हैं.
मॉडल अस्पताल बनने से बढ़ी लोगों की उम्मीद
सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किए जाने के बाद स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं. आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ बेहतर वातावरण और उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. सर्जरी जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का स्थानीय स्तर पर मिलना इसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
अस्पताल में जांच, दवा, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मरीजों को एक ही स्थान पर अधिक से अधिक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.
गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत
सरकारी अस्पताल में सर्जरी की सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत है. निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने पर बड़ी रकम खर्च होती है. ऐसे में सदर अस्पताल में उपलब्ध सरकारी सुविधा से मरीजों के परिजनों पर आर्थिक बोझ कम हो रहा है.
हालांकि अस्पताल की सुविधाओं में सुधार के साथ इसे लगातार बनाए रखना भी चुनौती है. चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों, दवाओं और आवश्यक उपकरणों की नियमित उपलब्धता जरूरी है. सर्जरी का लाभ लगातार मिलता रहे, इसके लिए ऑपरेशन थिएटर और संबंधित सेवाओं का सुचारू संचालन भी महत्वपूर्ण होगा.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा.
