कचरे के ढेर में घिरा मधेपुरा शहर, बदहाल सफाई व्यवस्था से बढ़ा बीमारी का खतरा

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 09 Jun 2026 1:08 PM

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मधेपुरा में पूर्णिया गोला और सुभाष चौक पर कचरे का ढेर

Madhepura News: मधेपुरा शहर की पहचान इन दिनों विकास से ज्यादा गंदगी और कचरे के ढेर से हो रही है. मुख्य बाजार से लेकर मोहल्लों और स्कूलों के आसपास तक कूड़े का अंबार लगा है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को बदबू, मच्छरों और बीमारियों के खतरे के बीच जीवन बिताना पड़ रहा है. नगर परिषद की सफाई व्यवस्था अब लोगों के निशाने पर है.

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अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

Madhepura News: मधेपुरा शहर इन दिनों स्वच्छता संकट से गुजर रहा है. शहर के लगभग हर वार्ड, गली और प्रमुख सड़क पर कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं. लगातार जमा हो रहे कूड़े और बदहाल सफाई व्यवस्था ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद नियमित रूप से कचरा उठाव सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रही है.

वार्ड से बाजार तक फैली गंदगी

शहर के वार्ड नंबर 1 से लेकर वार्ड नंबर 26 तक कई स्थानों पर कचरे का अंबार लगा हुआ है. मुख्य बाजार, बस स्टैंड और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है. कई जगहों पर दिनों तक कचरा नहीं उठने के कारण सड़ांध फैल रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई कर्मियों की कमी और निगरानी के अभाव में समस्या लगातार बढ़ती जा रही है.

बढ़ रहा बीमारियों का खतरा

बरसात के मौसम में गंदगी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. कचरे के साथ पानी मिलकर सड़कों पर फैल जाता है, जिससे जलजमाव की स्थिति बनती है. इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है.

सदर अस्पताल में भी बुखार और संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने की चर्चा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सफाई व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

व्यापारियों की भी बढ़ी परेशानी

गंदगी का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है. बाजार क्षेत्रों में कचरे के ढेर के कारण ग्राहकों का आना-जाना प्रभावित हो रहा है. कई दुकानदारों का कहना है कि वे निजी स्तर पर सफाई करवाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति बन जाती है.

व्यापारियों का मानना है कि स्वच्छ बाजार से ही ग्राहकों का भरोसा और कारोबार दोनों मजबूत होते हैं.

सुधार के दावे, लेकिन जमीन पर सवाल

नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार घर-घर कचरा संग्रहण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की नई योजना पर काम चल रहा है.

हालांकि शहर की मौजूदा तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. लोगों की मांग है कि नियमित कचरा उठाव, सफाई कर्मियों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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