मधेपुरा : मधेपुरा-पतरघट पथ पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में गुरुवार को जिला भू अर्जन पदाधिकारी अमन कुमार ने रैयतों की आपत्तियों पर सुनवाई की. इस दौरान 36 रैयतों की ओर से जमीन की श्रेणी, अधिग्रहण के रकबा और मुआवजे को लेकर अपनी बातें रखी गयीं.
कम से कम जमीन अधिग्रहण करने की मांग
रैयतों ने कहा कि संबंधित क्षेत्र मुख्य बाजार होने के कारण अधिकांश जमीन व्यावसायिक उपयोग में है और इसी से लोगों की जीविका चलती है. ऐसे में आरओबी परियोजना के लिए कम से कम रकबा में जमीन का अधिग्रहण किया जाए, ताकि लोगों की आजीविका पर कम से कम असर पड़े.
आवासीय श्रेणी पर भी जतायी आपत्ति
रैयतों ने जमीन की श्रेणी को लेकर भी आपत्ति दर्ज करायी. उनका कहना था कि मुख्य सड़क से सटी जमीन होने के बावजूद रिकॉर्ड में उसे आवासीय श्रेणी में बताया गया है, जबकि उन्होंने जमीन व्यावसायिक श्रेणी में खरीदी है और वहां दुकानें बनाकर कारोबार कर रहे हैं.
रैयतों ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में एमबीआर मूल्य के आधार पर मिलने वाले मुआवजे की तरह यहां भी जमीन की वास्तविक व्यावसायिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए व्यावसायिक दर से मुआवजा दिया जाए. साथ ही चार गुणा राशि देने की मांग भी रखी गयी.
जल्द शुरू होगी गजट की प्रक्रिया
जिला भू अर्जन पदाधिकारी अमन कुमार ने कहा कि सरकार के नियमों के आलोक में सभी कार्रवाई की जाएगी. भू अर्जन अधिनियम के अनुसार रैयतों की आपत्तियों पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि शीघ्र ही गजट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके बाद अमीन द्वारा प्रत्येक खेसरा पर पहुंचकर अधिग्रहण की जमीन का निशान लगाया जाएगा.
सुनवाई के दौरान प्रदीप कुमार झा, गणेश पीटर, सुभाष यादव, अमित कुमार सुल्तानिया, सतीश साह, रेमंड शोरूम सहित 36 रैयतों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
