मधेपुरा: सदर अस्पताल में सर्जरी सुविधाओं का विस्तार, अब हाइड्रोसील और हर्निया के मरीजों को नहीं जाना होगा बाहर

मधेपुरा सदर अस्पताल में सर्जिकल सेवाओं का विस्तार हुआ है. अब हाइड्रोसील और हर्निया जैसी सामान्य बीमारियों का ऑपरेशन यहीं किया जाएगा, जिससे मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा. यह पहल खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक बोझ कम करेगी.

मधेपुरा जिले के आम नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर एक राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के कड़े निर्देश के बाद मधेपुरा सदर अस्पताल में सर्जिकल सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है. अब हाइड्रोसील और हर्निया जैसी सामान्य लेकिन पीड़ादायक बीमारियों के ऑपरेशन के लिए मरीजों को महंगे निजी क्लीनिकों या दूरदराज के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा.

सदर अस्पताल में ही जरूरी प्री-ऑपरेटिव जांच, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजिकल परीक्षण के बाद योग्य मरीजों का ऑपरेशन स्थानीय स्तर पर शुरू कर दिया गया है. इन मूलभूत शल्य चिकित्सा सुविधाओं के बहाल होने से अस्पताल से होने वाले अनावश्यक रेफरल के मामलों में भारी कमी दर्ज की जा रही है.

हाइड्रोसील और हर्निया के मरीजों को मिली स्थानीय संजीवनी

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हाइड्रोसील और हर्निया की समस्या से बड़ी संख्या में लोग जूझते हैं. समुचित सर्जिकल सेटअप और सर्जन की उपलब्धता में बाधा के चलते पहले इन सामान्य केसों को भी हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था. अब सदर अस्पताल में नियमित ऑपरेशन की सुविधा बहाल होने से मरीजों को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलने लगा है.

चिकित्सकों के अनुसार, हाइड्रोसील में पुरुषों के अंडकोष के आसपास अवांछित तरल पदार्थ जमा होने से सूजन और असहनीय दर्द होता है, जबकि हर्निया में मांसपेशियों की कमजोरी के चलते आंतरिक अंग बाहर की ओर उभर आते हैं. इन दोनों ही स्थितियों में समय पर सर्जरी ही सबसे प्रभावी उपचार है, जो अब सदर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में संभव हो रहा है.

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश का असर, अनावश्यक रेफरल पर लगा ब्रेक

स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार, राज्य के सभी सदर अस्पतालों को आत्मनिर्भर बनाने और प्राथमिक स्तर के ऑपरेशनों को स्थानीय स्तर पर ही निपटाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में मधेपुरा सदर अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर को चाक-चौबंद किया गया है.

अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि केवल अत्यंत जटिल और अति-गंभीर मामलों को ही मेडिकल कॉलेज या उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए, ताकि मरीजों का समय और संसाधन दोनों बच सके.

पूर्ण चिकित्सीय जांच और मूल्यांकन के बाद ही होगा ऑपरेशन

सदर अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों की पहले वरिष्ठ चिकित्सकों और सर्जनों द्वारा गहन जांच की जाती है. आवश्यक चिकित्सीय मूल्यांकन और फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर ही सर्जरी की तिथि निर्धारित होती है.

यदि किसी मरीज में गंभीर सह-बीमारियां या अत्यधिक जटिलताएं पाई जाती हैं, जहां क्रिटिकल केयर सपोर्ट जरूरी हो, केवल उन्हीं मामलों में चिकित्सीय परामर्श के बाद मरीज को उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा.

गरीब परिवारों पर घटेगा आर्थिक बोझ, बचेंगे हजारों रुपये

इस व्यवस्था का सबसे सीधा लाभ जिले के निर्धन और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा. निजी नर्सिंग होम में हर्निया या हाइड्रोसील के ऑपरेशन में 20 से 40 हजार रुपये तक का भारी खर्च आता है. इसके अलावा दूसरे शहरों में जाने-आने, रहने और भोजन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी परिजनों पर पड़ता है.

सदर अस्पताल में यह पूरी सुविधा और जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध होने से गरीब मरीजों को आर्थिक तंगी से बड़ी निजात मिलेगी. स्वास्थ्य विभाग का मुख्य ध्येय यही है कि आवश्यक दवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपकरणों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखकर सरकारी अस्पतालों पर जनता का विश्वास सुदृढ़ किया जाए.

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By Aman Kumar

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