10 दिन में 20 रुपये महंगी हुई चीनी! मधेपुरा में सड़क पर उतरी सीपीएम, महंगाई पर सरकार को घेरा

मधेपुरा में महंगाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ, जिसमें सीपीएम ने चीनी की कीमतों में 20 रुपये की बढ़ोतरी का आरोप लगाया. पार्टी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी का पुतला फूंका और केंद्र सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं पर घेरा.

Madhepura Inflation Protest: मधेपुरा में रसोई के बजट पर बढ़ती महंगाई का असर अब राजनीतिक विरोध का मुद्दा भी बनता जा रहा है. चीनी की कीमत में कथित तौर पर 10 दिनों के भीतर 20 रुपये की बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीएम) ने मधेपुरा में प्रदर्शन किया. स्थानीय शहीद चूल्हाय चौक पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं समेत कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि आम परिवार पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान है. ऐसे में खाद्य वस्तुओं के दाम में अचानक बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर दबाव और बढ़ा दिया है. पार्टी ने महंगाई के खिलाफ संगठित आंदोलन की जरूरत बतायी.

10 दिन में चीनी 20 रुपये महंगी होने का दावा

सभा की अध्यक्षता कर रहे गणेश मानव ने कहा कि मोदी सरकार की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के कारण महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर है. उन्होंने दावा किया कि महज 10 दिनों के अंदर चीनी की कीमत 20 रुपये बढ़ गयी है.

उन्होंने कहा कि महंगाई का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. रसोई का खर्च बढ़ने से मजदूर, किसान और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि इस स्थिति से लड़ने के लिए लोगों को संगठित होकर संघर्ष करना होगा.

किसान और मजदूरों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

मजदूर नेता कॉमरेड ललन यादव और कॉमरेड पन्नालाल यादव ने सरकार पर किसान और मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया. नेताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए.

प्रदर्शन में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया. कॉमरेड मनीष कुमार और कॉमरेड अनिल लाल यादव ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है.

वहीं, कॉमरेड चंद किशोर यादव ने कहा कि किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद और उर्वरक उपलब्ध नहीं हो रहा है. उन्होंने किसानों की इस समस्या के समाधान की मांग की.

खनिज संपदा निजी कंपनियों को सौंपने का विरोध

कॉमरेड पतंजलि और कॉमरेड कौशल सिंह राठौड़ ने देश की खनिज और प्राकृतिक संपदा को निजी कंपनियों को सौंपे जाने का विरोध किया. उन्होंने सरकार से प्राकृतिक संसाधनों को निजी कंपनियों के हवाले करने की नीति पर रोक लगाने की मांग की.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल व्यापक जनहित में होना चाहिए. उनका आरोप है कि संसाधनों के निजीकरण से आम लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

छात्रों और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठा

प्रदर्शन के दौरान सिर्फ महंगाई और किसानों की समस्या ही नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाये गये. कॉमरेड राजदीप कुमार और कॉमरेड रोशन कुमार ने छात्र-विरोधी प्रशासनिक अत्याचार, गिरती शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते नशे पर रोक लगाने की मांग की.

नेताओं ने पटना में आंदोलनरत छात्रों पर कथित अत्याचार बंद करने की भी मांग की. उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं को दबाने के बजाय सरकार और प्रशासन को उनके मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए.

महंगाई से लेकर बेरोजगारी तक, कई मुद्दों पर प्रदर्शन

सीपीएम के इस प्रदर्शन में महंगाई को मुख्य मुद्दा बनाया गया, लेकिन सभा के दौरान बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों को उपज का उचित मूल्य, खाद-उर्वरक की उपलब्धता, प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण, शिक्षा व्यवस्था और नशे जैसे मुद्दे भी उठे.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इन समस्याओं का असर अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है. किसानों के लिए उत्पादन लागत बढ़ने और उचित मूल्य नहीं मिलने की समस्या है, जबकि आम परिवारों के सामने रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट संभालना चुनौती बनता जा रहा है.

Madhepura Inflation Protest: आगे भी आंदोलन तेज करने का संकेत

सीपीएम नेताओं ने महंगाई के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही. नेताओं के बयानों से संकेत मिला कि पार्टी इन मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलन और जनसंपर्क अभियान चला सकती है.

प्रदर्शन के मौके पर मजदूर नेता गोविंद शर्मा, अशोक यादव, ओम शंकर यादव, दिलखुश कुमार, अमित, मनीष, दिनेश यादव, प्रमोद राम और नाथन स्वर्णकार सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

मधेपुरा में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब महंगाई को लेकर राजनीतिक दल लगातार सरकार को घेरते रहे हैं. स्थानीय स्तर पर चीनी की कीमत में बढ़ोतरी के दावे ने इस विरोध को रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ दिया. अब देखने वाली बात होगी कि उठाये गये मुद्दों को लेकर पार्टी आगे किस तरह का आंदोलन करती है और सरकार या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.

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लेखक के बारे में

By राजकुमार

राजकुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. किशनगंज में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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