मधेपुरा : सड़क दुर्घटना के बाद घायल को समय पर इलाज मिलना सबसे जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है. ट्रैफिक डीएसपी चेतनानंद झा ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना में पात्र पीड़ित को निर्धारित अस्पताल में अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिल सकता है. यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक उपलब्ध रहने का प्रावधान है. खास बात यह है कि इसके लिए पीड़ित का आयुष्मान कार्डधारी होना अनिवार्य नहीं है.
हादसा होते ही 112 पर दें सूचना, पहले बचाएं जान
सड़क दुर्घटना के बाद अक्सर घटनास्थल पर भीड़ जुट जाती है. लोग चालक को जिम्मेदार ठहराने, मुआवजे की मांग या क्षतिग्रस्त वाहन को मौके पर रोकने को लेकर विवाद करने लगते हैं. इससे घायल को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो सकती है. ट्रैफिक पुलिस की अपील है कि हादसे के बाद विवाद में समय गंवाने के बजाय सबसे पहले घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं.
दुर्घटना होने पर 112 पर सूचना दी जा सकती है. मौके पर मौजूद व्यक्ति भी पुलिस या संबंधित आपात सेवा को सूचना दे सकता है. उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार घायल को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा सकता है. कोई व्यक्ति घायल को खुद अस्पताल लेकर जाता है तो भी इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए.
इलाज शुरू कराने से पहले नहीं जमा करनी होगी 1.50 लाख की रकम
योजना के तहत पात्र उपचार के लिए घायल के परिजनों को इलाज शुरू कराने से पहले 1.50 लाख रुपये जमा करने की जरूरत नहीं है. निर्धारित उपचार पैकेज के तहत कैशलेस तरीके से इलाज किया जाता है. यदि संबंधित अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञ या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है तो घायल को दूसरे उपयुक्त अस्पताल में रेफर किया जा सकता है.
खाते में नहीं आएंगे 1.50 लाख रुपये
पीएम राहत योजना को लेकर लोगों के बीच यह भ्रम है कि सरकार दुर्घटना पीड़ित के बैंक खाते में 1.50 लाख रुपये भेजती है. ऐसा नहीं है. यह राशि नकद मुआवजा नहीं, बल्कि पात्र उपचार के लिए निर्धारित कैशलेस चिकित्सा सुविधा की अधिकतम सीमा है. अस्पताल उपचार उपलब्ध कराता है और योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार संबंधी दावा प्रस्तुत करता है.
आयुष्मान कार्ड नहीं होने पर भी मिल सकता है लाभ
पीएम राहत के तहत सड़क दुर्घटना के पात्र पीड़ित को लाभ लेने के लिए पीएम-जेएवाई का लाभार्थी होना अनिवार्य नहीं है. वहीं, यदि दुर्घटना पीड़ित पीएम-जेएवाई का पात्र लाभार्थी है तो पात्रता के अनुसार उसे पीएम-जेएवाई के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य कवर का लाभ भी मिल सकता है.
पुलिस की प्रक्रिया जरूरी, लेकिन इलाज में न हो देरी
दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस दुर्घटना की पुष्टि और आवश्यक विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करती है. दुर्घटना से संबंधित जानकारी ई-डीएआर डिजिटल प्रणाली में भी दर्ज की जाती है. हालांकि, पुलिस की प्रक्रिया पूरी होने के इंतजार में घायल का उपचार रोकना उचित नहीं है. गंभीर स्थिति में प्राथमिकता जीवन रक्षक उपचार को दी जानी चाहिए.
अस्पताल इलाज से मना करे तो आरोग्य मित्र से करें संपर्क
यदि पात्र दुर्घटना पीड़ित को योजना के तहत उपचार देने से अस्पताल इनकार करता है तो परिजन अस्पताल में तैनात आरोग्य मित्र या योजना से जुड़े नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर संबंधित हेल्पलाइन या सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी की जा सकती है.
हादसे के बाद भीड़ नहीं, पहले बचाएं जान
ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि दुर्घटना के बाद चालक को घेरने, मुआवजे को लेकर विवाद करने या वाहन रोकने के बजाय घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाने पर ध्यान दें. समय पर मिला उपचार किसी की जान बचा सकता है. हादसा होने पर 112 पर सूचना दें और घायल को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं.
