नहीं रहे गजलकार छंगराज, मधेपुरा से था गहरा नाता फोटो- मधेपुरा 34कैप्शन- प्रतिनिधि, मधेपुरापत्थर भी गर्म होता है, पानी भी उबलता है. बरदाश्त की हद है इतना भी कोई सहता है. इन पंक्तियों के रचियता चर्चित शायर एवं गजलकार छंद राज का बुधवार की सुबह साढ़े छह बजे निधन हो गया. मुंगेर कार्य क्षेत्र होने के बावजूद वे गजल विद्या के शिखर रचनाकार एवं गायक थे. उनकी चर्चित पुस्तकल फैसला चाहिए एवं दर्द की फसले थी. उन्होंने तर्जनी पत्रिका का भी संपादन भ किये थे. बिहार राष्ट्रभाषा परिषद बिहार सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया था. वे बिहार में गजल लेखन के प्रतीक रहे साथ ही उनकी गजलों में राजनीति की कुरीतियों को बड़ी बारिकी से उकेड़ा जाता था. आज जीवन से जुड़ी आवाज की एक बानगी देखे. फिक्र को जब जुबान होती है, तब हकीकत बयान होती है, कितने मरूथल है पार करने को और अभी से थकान होती है.छंदराज का मधेपुरा के साहित्यकारों से विशेष अनुराग था. लगभग बीस वर्ष पूर्व मधेपुरा के तत्कालीन जिला पदाधिकारी आर एन प्रसाद एवं पुलिस अधीक्षक व शायर मनमोहन सिंह ने मधेपुरा नगर भवन में साहित्यकार संस्था सुरभि द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया. तब इनके गजल एवं शायरी से मधेपुरा नगर भवन तालियों से गुंज उठा था. कवि एवं बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सचिव डा अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि मधेपुरा सहित समूचे देश में समकालीन गजल को स्थापित करने में छंदराज जी का योगदान अविस्मणीय है. वे बिहार प्रदेश के सभी आयोजनों में उपस्थित होते थे. आम जन से जुड़ी समस्याओं का स्वर देते रहे. मधेपुरा आने पर अक्सर उनका स्वागत किया जाता रहा. जब मुंगरे में मथुरा प्रसाद गंुजन स्मृति सम्मान दिया जा रहा था तब छंद राज जी ने कहा था कि वे जल्द ही मधेपुरा जा कर गुरुवर हरि शंकर श्रीवास्वत शलभ का आशीर्वाद लेना चाहता हूं. लेकिन ऐसा नहीं हो सका, तुम सो गये दासतां कहते कहते…
नहीं रहे गजलकार छंगराज, मधेपुरा से था गहरा नाता
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