भूकंप के झटका से सहमे लोग

भूकंप के झटका से सहमे लोग- सोमवार की सुबह फिर डोली धरती प्रतिनिधि, मधेपुरा चार जनवरी की सुबह चार बज कर पैंतीस मिनट पर एक बार फिर धरती के डोलने से कोसी इलाके में चिंता की लहर दौड़ गयी है. विगत वर्ष अप्रैल माह में भूकंप की शृंखला के बाद लोग अब तक दहशत के […]

भूकंप के झटका से सहमे लोग- सोमवार की सुबह फिर डोली धरती प्रतिनिधि, मधेपुरा चार जनवरी की सुबह चार बज कर पैंतीस मिनट पर एक बार फिर धरती के डोलने से कोसी इलाके में चिंता की लहर दौड़ गयी है. विगत वर्ष अप्रैल माह में भूकंप की शृंखला के बाद लोग अब तक दहशत के साये में जी रहे है. हल्की सी आहट होने पर भूकंप आने का एहसास होता है. ऐसे में आज सुबह आये भूकंप ने कोसी क्षेत्र के लोगों को एक बार फिर उसी डर की दहलीज पर ला खड़ा किया है. जिला मुख्यालय के लक्ष्मीपुर मोहल्ला निवासी शिक्षिका रीना राय बताती है कि सुबह जब भूकंप आया तो लगा कि यह अप्रैल के भूकंप का ही डर है. लेकिन जब पंखा हिलता देखा तो भूकंप आने का यकीन हो गया. जब तक घर से निकलते भूकंप के झटके कम हो गये थे. लेकिन देह का कंपन बरकरार था. पता नहीं क्या होने वाला है, कहीं फिर से भूकंप का वहीं सिलसिला न शुरू हो जाये. वहीं पुरानी बाजार निवासी शारदा रंजन कहते है कि खिड़की की खड़खड़ाने की आवाज सुन कर पहले चोरों के आने का अंदेशा हुआ, लेकिन जल्दी ही समझ में आ गया कि यह भूकंप है. आज की रात कैसे सोये यह समझ नहीं आ रहा है. डर एक बार फिर जिंदा हो गया है. — अप्रैल के भूकंप का खौफ अब तक है बरकरार —-विगत वर्ष 25 अप्रैल को पूरे देश में धरती डोली लेकिन इस भूकंप ने कोसी क्षेत्र में लोगों को भीतर से तोड़ कर रख दिया. फिर 26 अप्रैल को दो बार और 27 अप्रैल को भी धरती डोली. इस प्रकार लगातार तीन दिनों तक लोग दहशत के साये में रहे और प्रकृति के सामने खुद को विवश पाया. — पहले भी आ चुके हैं भीषण भूकंप —-25 अप्रैल 2015 को नेपाल सहित कोसी के इलाके में भूकंप ने बड़ी तबाही मचायी. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.9 दर्ज की गयी थी. इस भूकंप का केंद्र बिंदु काठमांडू से 80 किमी दूर लामजुंग था. -15 जनवरी 1934 को आये भूकंप से इससे पूर्व नेपाल और बिहार में कुछ इसी तरह की तबाही मची थी. उस समय रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 8.4 आंकी गयी थी. -21 अगस्त 1988 को नेपाल और बिहार में बड़ा भूकंप आया था. जिसकी तीव्रता 6.6 आंकी गयी थी. — फिर से मच सकती है बड़ी तबाही– पृथ्वी की सतह अनेक टेक्टोनिक प्लेट से मिल कर बनी है. यह प्लेट चलायमान अवस्था में रहती है. इस वजह से जब दो प्लेट आपस में टकराते है तो भूकंप की स्थिति पैदा होती है. इससे पैदा हुई तरंग इमारतों पर क्षैतिज रूप से असर डालती है जिससे बड़ी – बड़ी मंजिले धारा शायी हो जाती है. भूकंप को मापने का यंत्र सिस्मोग्राफर है और इसकी तीव्रता की इकाई रिक्टर है. कृत्रिम जलाशयों के निर्माण से भी भूकंप आते है. — जोन 5 में स्थित है कोसी– भूगर्भ शास्त्रियों ने भूकंप की तीव्रता के आधार पर देश को पांच जोन में बांटा है. जोन एक में भूकंप की तीव्रता 3.9 तक होती है. इसका अक्सर आम लोगों पता नहीं चल पाता है. जोन दो में तीव्रता 4.0 से 5.9 तक होती है. इसमें हल्का नुकसान होता है. जोन तीन में तीव्रता 6.0 से 6.9 तक होती है इसमें जान माल को नुकसान पहुंचता है. जोन चार में तीव्रता 7 से 7.9 तक होती है. इसमें बड़ी तबाही मचती है. 25 अप्रैल को आया भूकंप इसी श्रेणी में आता है. जिस वजह से नेपाल में हजारों लोगों की जान गयी. जोन पांच में 7.9 से अधिक तीव्रता को रखा गया है. इसे महा भूकंप कहा जाता है. कोसी का इलाका इसी जोन पांच में आता है. — मकान बनाने में लायें बदलाव –आर्किटेक्ट के अनुसार कोसी के इलाके में 90 फीसदी मकान लोड बियरिंग तकनीक पर बनते है जो बिना किसी इंजीनियरिंग गणना के आधार पर होता है. इस इलाके में फ्रेम स्ट्रक्चर भवन बनना चाहिए. जो रिक्टर स्केल के आधार पर डिजाइन किये जाते है. ऐसे ही मकान महाभूकंप की स्थिति में सुरक्षित रह सकते हैं.

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