जमीन पर कब्जा जमाने को लेकर तनाव

जमीन पर कब्जा जमाने को लेकर तनाव -भूधारियों ने तत्काल प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंजअनुमंडल मुख्यालय स्थित दुर्गा स्थान चौक से पश्चिम वार्ड नंबर छह की ओर जाने वाली वायपास सड़क में राजेंद्र चौधरी के लाखों रुपये की बेस कीमती जमीन का फर्जी बासगीत परचा बनाकर जबरन जमीन पर घर बनाने […]

जमीन पर कब्जा जमाने को लेकर तनाव -भूधारियों ने तत्काल प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंजअनुमंडल मुख्यालय स्थित दुर्गा स्थान चौक से पश्चिम वार्ड नंबर छह की ओर जाने वाली वायपास सड़क में राजेंद्र चौधरी के लाखों रुपये की बेस कीमती जमीन का फर्जी बासगीत परचा बनाकर जबरन जमीन पर घर बनाने को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव का माहौल व्याप्त है. इससे किसी भी वक्त कोई अनहोनी की आशंका बनी हुई है. भूधारियों ने तत्काल प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है. भूधारी की जमीन को हथियाने के लिए दलित परिवार तरह तरह के हथकंडे अपना रही है. इसके जद में अधिकारियों की गलत मानसिकता को इंकार नहीं किया जा सकता है. कल तक राजस्व विभाग के अधिकारी के पास निर्गत परचा का दस्तावेज मौजूद नहीं था. लेकिन, चंद महीनों में ही अधिकारी के स्वर बदल गये. इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि भूधारी राजेंद्र चौधरी के दो-दो बार मांगी गई सूचना में पर्चा निर्गत नहीं होने की बात बतायी गयी. तीसरी बार की सूचना में राजस्व विभाग परचा की पुष्टि तो नहीं की है. इस बात को महज दरशा रहा है कि लगान रसीद कटा हुआ है. ऐसे में राजस्व विभाग के कर्मियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगता हुआ नजर लग रहा है. उदाकिशुनगंज के राजेंद्र चौधरी यौगेंद्र चौधरी और विनोद चौधरी की जमीन पर अवध पासवान और सुरेश पासवान जबरन कब्जा जमाना चाह रहा है. सुरेश पासवान और अवध पासवान का दावा है कि उसके पास जमीन का परचा प्राप्त है. वहीं भूधारी का मानना है कि निर्गत पर्चा का कोई साक्ष्य नहीं है. जमीन को लेकर जब विवाद उठा तो राजेंद्र चौधरी ने ग्राम कचहरी न्यायलय में एक वाद दायर किया. जहां सरपंच ने दोनों ओर से पंच गठित कर मामले की सुनवाई शुरू की. लंबे समय तक चले बाद में अवध पासवान और सुरेश पासवान ग्राम कचहरी में उपस्थित नहीं हुए और न ही कोई साक्ष्य उपस्थित किये. सरपंच पूर्ण सुनवाई के बाद राजेंद्र चौधरी के पक्ष में अपना फैसला सुनाया. मामले के बाद अंचल अमीन द्वारा पैमाईश किया गया. अंचल अमीन को भी अवध और सुरेश को साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराये. भूधारी राजेंद्र चौधरी के पुत्र राकेश कुमार ने दिनांक 05़ 12़ 2014 को अंचलाधिकारी से सूचना के अधिकार के तहत जानना चाहा कि मौजा किशुनगंज थाना नंबर 192 खाता संख्या 426 नया खेसरा संख्या 837, 838, 845 से वर्तमान में किसी व्यक्ति के नाम से वासगीत परचा भी निर्गत हुआ है. जहां राजस्व कर्मचारी ने सूचना में बताया कि वर्तमान में किसी व्यक्ति के नाम से वासगीत परचा जमाबंदी निर्गत नहीं है. पुन: उनके द्वारा 10़ 12़ 2014 को सूचना मांगा कि वासगीत परचा वाद संख्या 15/39 वर्ष 93-94 का बजाबता नकल दी जाय. जहां सूचना में बताया गया कि उक्त वाद का कोई दस्तावेज नहीं है. पर्चा गलत है. दिनांक 18़ 07़ 2015 को यौंगेद्र चौधरी द्वारा मांगे गए सूचना के अधिकार में बताया गया कि कार्यालय में उक्त वाद का दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. बाद में राकेश कुमार, यौगेंद्र चौधरी और विनोद कुमार चौधरी द्वारा अलग अलग तिथि में सूचना की मांग की गई. जहां सूचना में यौगेंद्र चौधरी को बताया गया कि जमीन के खता संख्या 426 खेसरा संख्या 837 और 845 में से रकवा 0़ 02 डीसमील जमीन अवध पासवान खेसरा संख्या 845 में से डेढ डीसमील जमीन सुरेश पासवान के नाम लगान रसीद कटा हुआ है. राकेश चौधरी को बताया गया कि खेसरा 837 और 845 में से दो डीसमील जमीन अवध पासवान और खेसरा संख्या 838 और 845 में से ही एक डीसमील जमीन का रसीद सुरेश पासवान के नाम से कटा हुआ है. विनोद चौधरी को सूचना में बताया गया कि खेसरा संख्या 837 और 845 में से दो डीसमील जमीन अवध पासवान और खेसरा 845 में से डेढ डीसमील जमीन का रसीद सुरेश पासवान के नाम से कटा हुआ है. इस सूचना के बाद तीनों भूधारियों ने पर्चा के विरूद्घ जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में वाद दायर किया. वाद न्ययालय में स्वीकृत हो गई है. वाद चल ही रहा था कि कथित पर्चाधारी जमीन पर कब्जा जमाना शुरू कर दिये. माहौल बिगरता देख भूधारी तत्काल अनुमंडल पदाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया. जहां विवादित भूमि पर 144 लागू किया गया. निशेधज्ञा के समय बीत जाने के बाद जमीन पर परचाधारी पुन: कब्जा जमाने का प्रयास किया. उसके बाद भूधारी ने थाना और अंचल को सूचना दी. लेकिन मामले में अधिकारी ने दिलचस्पी नहीं ली. भूधारी पुन: अनुमंडलाधिकारी से आग्रह किये तो एसडीओ ने थाना और अंचल को मामले में कार्रवाई को लिखा. इधर परचाधारी ने 31 दिसबंर की रात चुपके से विवादित जमीन पर झोपड़ी चढा दिया है. बताया जा रहा है कि जमीन पर कब्जा जमा परचाधारी अपना पक्ष मजबूत करना चाह रहे है. यह मामला करीब दो सालों से चल रहा है. जमीन को लेकर दोनों पक्षो के बीच तनाव है. इससे बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है. जमीन को लेकर कभी भी खूनी संघर्ष हो सकता है. — वर्जन — मामला डीएम कोर्ट में चल रहा है. मामला थाना के जनता दरबार में भी है. दोनों पक्ष को शांति बरतने की सलाह दी गई है. सोमवार को मैं स्वयं स्थल पर जाकर मामले की जांच करूंगा.उत्पल हिमवान, अंचलाधिकारी, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा — वर्जन – मामला जानकारी में नहीं है, मामला सामने आने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी. केबी सिंह, थानाध्यक्ष, उदाकिशुनगंज मधेपुरा

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