मिट्टी खुदाई में मिली पालकालीन शिल्पकला प्रतिमा, अब संग्रहालय बनेगीआकर्षण का केंद्र

Pala Period: लखीसराय जिले की सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है. संसार पोखर से प्राप्त भगवान कुबेर की प्राचीन प्रतिमा को शनिवार को विधिवत रूप से लखीसराय संग्रहालय में स्थापित कर दिया गया. करीब 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच की मानी जा रही है.

लखीसराय से राजीव मुरारी सिन्हा की रिपोर्ट:

Pala Period: लखीसराय की ऐतिहासिक धरोहर में एक और अनमोल अध्याय जुड़ गया है. संसार पोखर की खुदाई में मिली 9वीं सदी की भगवान कुबेर प्रतिमा को संग्रहालय में स्थापित कर दिया गया है. विशेषज्ञ इसे पालकालीन कला और क्षेत्र के समृद्ध इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण मान रहे हैं.

संसार पोखर की खुदाई में मिली थी प्रतिमा

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. मृणाल रंजन ने बताया कि 17 जून को संसार पोखर में मिट्टी उत्खनन के दौरान एक प्राचीन प्रतिमा मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी. सुरक्षा की दृष्टि से इसे कवैया थाना में रखा गया था. शनिवार को सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कवैया थानाध्यक्ष रंधीर कुमार ने प्रतिमा संग्रहालय प्रशासन को सौंप दी.

भगवान कुबेर की प्रतिमा की क्या है खासियत

प्राथमिक जांच में प्रतिमा की पहचान धन के देवता भगवान कुबेर के रूप में की गई है. लगभग दो फीट ऊंची यह प्रतिमा काले प्रस्तर पत्थर से निर्मित है. इसमें भगवान कुबेर कमलासन पर ललितासन मुद्रा में विराजमान हैं. उनके बाएं हाथ में रत्न उगलता हुआ नेवला (नकुलक) दर्शाया गया है, जो कुबेर की प्रमुख पहचान मानी जाती है.प्रतिमा में लम्बोदर स्वरूप, यज्ञोपवीत, धारीदार धोती, हार, बाजूबंद, पायल और कमरबंध जैसी बारीक कलात्मक नक्काशी दिखाई देती है. हालांकि मूर्ति का सिर और कुछ हिस्से खंडित हैं, फिर भी इसकी शिल्पकला बेहद आकर्षक और ऐतिहासिक महत्व की है.

पालकालीन कला और इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण

विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिमा पालकालीन कला शैली का उत्कृष्ट नमूना है. डॉ. मृणाल रंजन ने बताया कि लखीसराय प्राचीन काल में बौद्ध और हिंदू संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. ऐसे में भगवान कुबेर की यह प्रतिमा क्षेत्र में धार्मिक सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक समृद्धि की ऐतिहासिक गवाही देती है.

संग्रहालय में बढ़ेगा आकर्षण

संग्रहालय प्रशासन का मानना है कि इस दुर्लभ प्रतिमा के प्रदर्शित होने से शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यटकों को क्षेत्र की प्राचीन विरासत को समझने का नया अवसर मिलेगा. प्रतिमा को संग्रहालय तक पहुंचाने में तकनीकी सहायक राजेश कुमार, संग्रहालय कर्मी अंकित कुमार तथा सुरक्षा कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

ALSO READ: स्पीड ब्रेकर भी नहीं रोक पा रहे ओवरलोड वाहनों का कहर, टूटा रेलवे पुल का बैरियर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Pintu Pranav

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >