लखीसराय से राजीव मुरारी सिन्हा/राजेश कुमार की रिपोर्ट
NEET 2026 Re-Exam Scam: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में बिहार के लखीसराय से चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है. जिले के दो परीक्षा केंद्रों पर पुलिस और प्रशासन ने बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें एमबीबीएस के छात्र, बायोमैट्रिक सुपरवाइजर, तकनीकी कर्मी और बिचौलिये शामिल हैं.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बायोमैट्रिक सिस्टम में फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के बावजूद परीक्षार्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश दिलाया गया. पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.
हसनपुर केंद्र से खुला फर्जीवाड़े का पहला राज
लखीसराय के कवैया थाना क्षेत्र स्थित हसनपुर उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर रविवार दोपहर गुप्त सूचना मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया. केंद्राधीक्षक मृत्युंजय कुमार को जानकारी मिली कि एक अभ्यर्थी की जगह दूसरा युवक परीक्षा देने आने वाला है. सूचना मिलते ही मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने जांच शुरू की.
भौतिक सत्यापन के दौरान एक संदिग्ध युवक पकड़ा गया. पूछताछ में उसने अपना नाम मंतोष कुमार बताया. वह मधेपुरा का रहने वाला है और न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्र है. जांच में सामने आया कि वह नालंदा निवासी संजीत कुमार की जगह परीक्षा देने पहुंचा था.
NEET 2026 Re-Exam Scam: लाखों की डील, मेडिकल छात्र बना ‘स्कॉलर’
पुलिस पूछताछ में मंतोष कुमार ने कई सनसनीखेज खुलासे किये. उसने बताया कि पूरे फर्जीवाड़े का संचालन पावापुरी मेडिकल कॉलेज के छात्र रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट द्वारा किया जा रहा था. संजीत कुमार को परीक्षा में पास कराने के लिए लाखों रुपये का सौदा तय हुआ था.
पुलिस ने मौके से असली परीक्षार्थी संजीत कुमार और उसके भाई रंजीत कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठित सॉल्वर गैंग लंबे समय से सक्रिय हो सकता है.
बायोमैट्रिक सिस्टम भी हुआ फेल, पैसे लेकर दिलायी गयी एंट्री
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू बायोमैट्रिक व्यवस्था में हुई कथित मिलीभगत है. जांच में सामने आया कि फर्जी परीक्षार्थी का फिंगरप्रिंट मूल अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था. इसके बावजूद उसे परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दे दिया गया.
पुलिस के अनुसार, बायोमैट्रिक टेंडर से जुड़े कर्मियों और सुपरवाइजर को कथित रूप से मोटी रकम देकर अपने पक्ष में कर लिया गया था. हसनपुर केंद्र से छह बायोमैट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें सुपरवाइजर बादल कुमार भी शामिल हैं.
केआरके हाईस्कूल में भी पकड़ा गया दूसरा सॉल्वर
हसनपुर केंद्र का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि कवैया थाना क्षेत्र के केआरके उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र से भी फर्जीवाड़े का दूसरा बड़ा मामला सामने आ गया.
शाम करीब चार बजे सूचना मिली कि कमरा संख्या छह में बैठा एक छात्र किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहा है. जांच में युवक की पहचान विवेक कुमार के रूप में हुई, जो एएन मगध मेडिकल कॉलेज का चौथे वर्ष का एमबीबीएस छात्र है.
विवेक कुमार प्रभात अमन नामक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहा था. पूछताछ के दौरान उसने अपने सहयोगी अर्पित राज का नाम बताया, जो परीक्षा केंद्र के बाहर उसका इंतजार कर रहा था. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अर्पित को भी गिरफ्तार कर लिया.
NEET 2026 Re-Exam Scam: मास्टरमाइंड की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी
पुलिस जांच में दोनों मामलों में एक ही नाम सामने आया है. रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. पुलिस का कहना है कि उसने कई अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर मेडिकल छात्रों को परीक्षा में बैठाने की व्यवस्था की थी.
इसके अलावा बायोमैट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव की भूमिका भी संदिग्ध पायी गयी है. दोनों फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.
34 मोबाइल, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को भी जांच में शामिल किया गया है. टीम ने दोनों परीक्षा केंद्रों से फर्जी आधार कार्ड, एडिट किये गये एडमिट कार्ड, उपस्थिति पत्रक और बायोमैट्रिक टैब जब्त किये हैं.
हसनपुर केंद्र से नौ मोबाइल फोन और केआरके केंद्र से 25 मोबाइल फोन जब्त किये गये हैं. डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर सॉल्वर गैंग के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है.
NEET 2026 Re-Exam Scam: इतनी सुरक्षा के बावजूद कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
NEET UG पुनर्परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की थी. परीक्षार्थियों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू हुआ था और दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी को प्रवेश नहीं दिया गया. परीक्षा कर्मियों को सुबह सात से आठ बजे के बीच ही केंद्र पहुंचना था.
सभी कर्मियों के मोबाइल फोन पहले ही जमा करा लिये गये थे. परीक्षा केंद्रों के आसपास जैमर भी लगाया गया था ताकि इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क काम न कर सके. इसके बावजूद दो केंद्रों से इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है.
तीन एफआईआर, कई धाराओं में केस दर्ज
पूरे मामले में कवैया थाना में कांड संख्या 244/26 और 245/26 समेत कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है.
साइबर डीएसपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है. पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारियों की संख्या और बढ़ सकती है.
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