लखीसराय जिले में पिछले कई दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. मुख्य गंगा नदी के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों—किऊल और हरोहर के जलस्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है.
नदियों का पानी घटने से निचले और दियारा इलाकों में जलमग्न हुई सड़कों से बाढ़ का पानी उतर गया है, जिससे ठप पड़ा सड़क संपर्क और आवागमन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है.
बारिश थमने से नदियों का उफान हुआ धीमा
जिले में बीते दो दिनों से भारी बारिश का सिलसिला थमने के कारण जल ग्रहण क्षेत्रों से पानी का दबाव कम हुआ है.
सदर प्रखंड के रेहुआ, अमहरा तथा किऊल दियारा क्षेत्र के जिन संपर्क मार्गों पर कई फीट पानी बह रहा था, वहां अब जलस्तर नीचे चला गया है. इससे स्थानीय ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है. जहां कुछ दिन पहले केवल नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई थी, वहां अब लोगों ने पैदल और मोटरसाइकिल से आना-जाना शुरू कर दिया है.
अधिकारियों ने ली राहत की सांस, खेतों में अब भी जलजमाव
नदियों के घटते स्तर से जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है. हालांकि, दियारा और निचले इलाकों के सैकड़ों एकड़ खेतों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है.
प्रशासन ने जलस्तर घटने के बावजूद नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को पूरी तरह सतर्क और सजग रहने की हिदायत दी है.
हल्की बारिश का अनुमान, भारी अलर्ट नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, गुरुवार को जिले में एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की या छिटपुट बारिश की संभावना बनी हुई है. हालांकि, किसी भी प्रकार की मूसलाधार या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है, जिससे नदियों के दोबारा अचानक उफनाने का तत्काल कोई खतरा नहीं दिख रहा है.
दवा, पेयजल और राहत सामग्री का प्रबंध जारी: एसडीओ
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) प्रभाकर कुमार ने स्थिति स्पष्ट की.
"गंगा, किऊल और हरोहर नदी के जलस्तर में निरंतर गिरावट आ रही है, जिससे अधिकांश जलमग्न इलाकों से पानी उतर रहा है. प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और प्रभावित ग्रामीणों के लिए आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं, शुद्ध पेयजल के पाउच/टैंकर और भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है." — प्रभाकर कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), लखीसराय
