फॉर्मर रजिस्ट्री के पेच में उलझे किसान, दफ्तरों में कामकाज प्रभावित

फॉर्मर रजिस्ट्री के पेच में उलझे किसान, दफ्तरों में कामकाज प्रभावित

राजस्व व कृषि विभाग के संयुक्त अभियान में तकनीकी बाधाएं बनीं रोड़ा, लक्ष्य पूरा करना चुनौती

लखीसराय. जिले के किसानों की जमीन की जमाबंदी कायम करने व फॉर्मर रजिस्ट्री को लेकर पंचायतों में आयोजित शिविर वर्तमान में अपनी उपयोगिता साबित करने में विफल नजर आ रहे हैं. कृषि और राजस्व विभाग के प्रधान सचिवों के संयुक्त आदेश पर शुरू हुए इस अभियान में जमीनी स्तर पर कई तकनीकी समस्याएं आड़े आ रही हैं. आलम यह है कि दिन भर की मशक्कत के बाद भी बमुश्किल एक या दो किसानों की रजिस्ट्री हो पा रही है, जिससे अधिकारियों का समय बर्बाद हो रहा है व किसानों को निराशा हाथ लग रही है.

बंटवारा व सहमति का अभाव सबसे बड़ी बाधा

फॉर्मर रजिस्ट्री में आ रही समस्याओं की मुख्य वजह वंशावली और बंटवारा है. अधिकांश मामलों में जमाबंदी पूर्वजों के नाम पर है. सरकारी नियमानुसार, बंटवारा सूट के शेड्यूल के अनुसार सभी हिस्सेदारों की उपस्थिति व आपसी सहमति अनिवार्य है. गांव की राजनीति व पारिवारिक विवादों के कारण हिस्सेदार एक मंच पर नहीं आ पा रहे हैं, जिसके कारण राजस्व कर्मचारी और सर्वे अमीन चाहकर भी जमाबंदी की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं.

अंचल कार्यालयों में लटका दाखिल-खारिज और परिमार्जन

इस अभियान का सीधा असर अंचल कार्यालयों के अन्य कार्यों पर पड़ रहा है. दाखिल-खारिज व परिमार्जन जैसे जरूरी कार्यों के लिए जब लोग अंचल कार्यालय पहुंच रहे हैं, तो उन्हें कर्मचारी फील्ड में होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है. इधर फील्ड में रहने के बावजूद तकनीकी पेचों के कारण किसानों के नाम जमाबंदी दर्ज नहीं हो पा रही है. दोहरे दबाव के कारण राजस्व कर्मियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है.

कृषि विभाग पर बढ़ा योजनाओं का दबाव

मार्च महीना नजदीक आते ही कृषि विभाग पर विभिन्न सरकारी योजनाओं को पूरा करने का भारी दबाव है. कृषि समन्वयकों को फॉर्मर रजिस्ट्री के लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे वे अपने मूल विभागीय कार्यों को समय नहीं दे पा रहे हैं.

कहते हैं अधिकारी

सरकार के गाइडलाइन के अनुसार सभी कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करना है. फॉर्मर रजिस्ट्री किसानों के हित की योजना है, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए विभाग अतिरिक्त समय दे रहा है. तकनीकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. — कुंदन कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ), लखीसराय.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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