लखीसराय जिले में पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए एक अच्छी पहल हुई है. माउंट लिटरा जी स्कूल परिसर में केंद्र सरकार के बड़े अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के अंतर्गत विशेष पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इस कार्यक्रम के तहत कक्षा-1 के अच्छे छात्र अर्श आदिश रंजन के माता-पिता ने विद्यालय प्रांगण में फलदार व छायादार पौधे रोपे. ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने आम का पौधा लगाया है. इस अवसर पर छात्र की माता अंजू मेहता और पिता रवि रंजन कुमार के साथ विद्यालय की सेक्रेटरी विजेता स्नेही तथा चेयरमैन संजीव कुमार स्नेही विशेष रूप से उपस्थित रहे.
हर जन्मदिन पर पौधा लगाने का लिया अनूठा पारिवारिक संकल्प
पौधारोपण के दौरान छात्र अर्श के माता-पिता ने एक अनूठी और अनुकरणीय शपथ ली. छात्र के पिता रवि रंजन कुमार और माता अंजू मेहता ने कहा कि वे केवल औपचारिकता के लिए पेड़ नहीं लगा रहे हैं, बल्कि उन्होंने यह पक्का इरादा लिया है कि वे प्रत्येक वर्ष अर्श आदिश रंजन के जन्मदिन के अवसर पर अनिवार्य रूप से एक नया पौधा लगाएंगे, क्योंकि वे अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य और इस धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए यह बेहद ज़रूरी मानते हैं. इस तरह वे पर्यावरण की रक्षा में निरंतर अपना योगदान देंगे.
अभिभावकों के इस पर्यावरण को अच्छा मानने वाले फैसले का विद्यालय परिवार और वहां उपस्थित अन्य बच्चों ने जोरदार तालियां बजाकर स्वागत किया.
स्कूल प्रबंधन ने ली पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी
विद्यालय की सेक्रेटरी विजेता स्नेही ने अभिभावकों की इस अच्छी पहल की खुलकर तारीफ की. उन्होंने घोषणा की कि छात्र के परिवार द्वारा लगाए गए इस पौधे की देखरेख, सिंचाई और सुरक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन संभालेगा.
उन्होंने कहा कि यह मात्र एक पौधा लगाना भर नहीं है, बल्कि मासूम बच्चों को अपनी मिट्टी और प्रकृति के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक मजबूत जरिया है, जिससे वे बचपन से ही हरियाली का महत्व समझ सकें.
बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना जरूरी: संजीव स्नेही
माउंट लिटरा जी स्कूल के चेयरमैन संजीव कुमार स्नेही ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयास बच्चों के कोमल मन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव पैदा करते हैं.
उन्होंने रेखांकित किया कि जब कोई बच्चा अपने नाम से रोपे गए पौधे को समय के साथ एक विशाल वृक्ष बनते देखता है, तो उसके भीतर प्रकृति के प्रति अपनापन की भावना गहरी होती है. इससे बड़े होकर पर्यावरण संरक्षण की एक मजबूत नींव बनती है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अर्श के परिवार की यह पहल अन्य सभी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी अपने विशेष दिनों पर प्रकृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी. कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को स्मृति चिन्ह और धन्यवाद ज्ञापित किया गया.
