अनुशासन अपनाकर बुनबुन ने दी बीमारी को मात

अनुशासन अपनाकर बुनबुन ने दी बीमारी को मात

मजदूरी की थकान समझ जिसे टाला, वह निकली टीबी, बुनबुन दास की संघर्ष व जीत की कहानी

लखीसराय. दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी व मजदूरी की थकान के बीच जब लखीसराय के बुनबुन दास अपने घर लौटे, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनके भीतर एक जानलेवा बीमारी पल रही है. जिसे वे ”काम की थकान” व मामूली बुखार समझकर टाल रहे थे, वह दरअसल उनके फेफड़ों पर टीबी का हमला था. आज बुनबुन न सिर्फ स्वस्थ हैं, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल बन चुके हैं.

बीमारी को अनदेखा करने की भूल

बुनबुन दास आर्थिक तंगी दूर करने के लिए दिल्ली में मजदूरी करते थे. घर लौटने पर जब उन्हें बुखार रहने लगा, तो उन्होंने इसे मौसम का असर माना. वे बताते हैं, “मैंने बाजार से दवाइयां लेकर खाईं, पर कमजोरी बढ़ती गई. मैं इतना लाचार महसूस कर रहा था कि अपने गांव की आशा दीदी (पप्पी कुमारी) के पास गया और उनसे विनती की कि मुझे बस अस्पताल ले जाकर पानी चढ़वा (सलाइन) दीजिए, ताकि मैं ठीक होकर वापस मजदूरी पर लौट सकूं. “

आशा दीदी की पैनी नजर ने बदला रास्ता

बुनबुन के लिए जीवन का टर्निंग पॉइंट तब आया जब सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की आशा कार्यकर्ता पप्पी कुमारी ने उनकी बात सुनी. पप्पी कुमारी ने पाया कि बुनबुन को सिर्फ बुखार नहीं था, बल्कि वे लगातार खांस भी रहे थे. उन्होंने बिना देरी किए बुनबुन को सदर अस्पताल में जांच के लिए प्रेरित किया. जांच में ”पल्मोनरी टीबी” (फेफड़ों की टीबी) की पुष्टि हुई.

नौ महीने का अनुशासन व मिली जीत

स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज के मुताबिक, टीबी की पुष्टि होते ही बुनबुन का निशुल्क इलाज शुरू किया गया. भारी दवाओं के सेवन और शारीरिक कमजोरी के बावजूद बुनबुन ने हार नहीं मानी. उन्होंने पूरे 9 महीने तक नियमित दवा का सेवन किया. निशांत राज ने बताया कि सही परामर्श और समय पर दवा प्रबंधन के कारण ही बुनबुन आज पूरी तरह संक्रमण मुक्त हो चुके हैं.

अब जागरूकता के सिपाही बने बुनबुन

बीमारी से जंग जीतने के बाद अब बुनबुन का जीवन के प्रति नजरिया बदल गया है. वे कहते हैं, “सरकारी अस्पताल की निशुल्क दवा और आशा दीदी की सही सलाह ने मुझे मौत के मुंह से निकाला है. अब मैं किसी भी लक्षण को छोटा समझकर नजरअंदाज नहीं करता. “

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुधांशु नारायण लाल ने कहा कि जिले में चल रहे ”100 डेज” जागरूकता अभियान के तहत बुनबुन जैसे लाभार्थियों की कहानियां समुदाय में प्रेरणा भर रही हैं. स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी संदिग्ध मरीज जांच से छूटे नहीं, ताकि टीबी मुक्त समाज का सपना साकार हो सके.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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