गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में सीबीएसइ के निर्देश का कैसे होगा पालन
सूर्यगढ़ा : स्थानीय बाजार के थाना चौक के पास रहने वाले अरविंद कुमार का पुत्र एक निजी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ता है़ अरविंद ने बताया कि बच्चे की पढ़ाई के लिए पुस्तक से लेकर कॉपी, बेल्ट, टाई आदि स्कूल से ही खरीदना पड़ता है़ छठी कक्षा के लिए अकेले 3600 रुपये चुकाना पड़ा. स्कूल प्रबंधन की मनमानी के कारण अभिभावक परेशान हैं. हर साल पाठ्य पुस्तक में बदलाव लाकर स्कूल प्रबंधन लाखों रुपया कमा रहा है़ प्राइवेट स्कूलों के द्वारा लिखी गयी पुस्तकें बाजार में नहीं मिलती है,
यहां तक की स्कूल प्रबंधन सिलेबस की बुक लिस्ट भी उपलब्ध नहीं कराता है. इसकी वजह से अभिभावक स्कूल से ही पुस्तक सहित अन्य सामग्री खरीदने को मजबूर हैं. सीबीएसइ पाठ्यक्रम के स्कूलों में भी एनसीइआरटी की पुस्तक नहीं चलायी जाती. इस वजह से महंगी पुस्तकें अभावकों के पॉकेट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा़ कोई भी पुस्तक 150 रुपये से कम की नहीं होती़ पुस्तक पर स्टीकर साट कर अंकित मूल्य से भी अधिक राशि वसूला जा रहा है़
जी हां, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का यह एक नमूना भर है. हाल में सीबीएसइ ने सख्त हिदायत दी है कि स्कूलों में किताब कॉपी व स्टेशनरी नहीं बिकेगी़ प्रखंड के अधिकतर निजी स्कूल निजी स्कूल किताब-कॉपी आदि बेच रहे हैं. सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूल प्रबंधन इस कारोबारी की तैयारी कर लेता है़ हर साल पुस्तकें बदल दी जाती है ताकि अभिभावकों को हर हाल में स्कूल से नयी पुस्तकों का सेट खरीदने के लिए दवाब बनाया जा सके़ अभिभावक चाह कर भी दुकानों से इन पुस्तकों की खरीदारी नहीं कर सकते, क्योंकि जो सिलेबस स्कूल लागू करते हैं, वह अन्य दुकानों पर उपलब्ध नहीं रहती है़
लगे लगाम: अभिभावकों का कहना है कि जिले में गिने चुने स्कूल सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं. ऐसे में जिला प्रशासन, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय या अन्य जगहों से पंजीकृत विद्यालयों पर नकेल कसें तभी क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा़
आठवीं तक के स्टूडेंट्स से होती है कमाई
सूर्यगढ़ा प्रखंड में किसी भी विद्यालय को सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त नहीं है, पर सभी प्राइवेट स्कूल सीबीएसइ पाठ्यक्रम से पढ़ाने की बात कहते हैं. इसमें अधिकांश स्कूल जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पंजीकृत होकर विद्यालय संचालन कर रहे हैं. निजी विद्यालयों में प्री नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों को कमाई का जरिया बनाया जाता है़
बोर्ड स्तर की परीक्षा के कारण एनसीइआरटी का सिलेबस लागू करना मजबूरी है. ये विद्यालय सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त विद्यालयों से टैग कर छात्रों को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने का काम करते हैं. विद्यालयों में प्री नर्सरी से आठवीं तक स्कूल द्वारा निर्धारित सिलेबस ही लागू किया जाता है, जिसकी वजह से प्रबंधन को इनके द्वारा अच्छी कमाई होती है़ अकेले किताब में 40 प्रतिशत तक कमीशन प्राप्त होता है़
